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अमर उजाला लिविंग हिंस्ट्री में जब करजई बोले बाबूजी धीरे चलना...

Mon, 23 Apr 2018 09:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला और इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज (आईपीसीएस) की ओर आयोजित ‘लिविंग हिस्ट्री’ श्रृंखला की पहली कड़ी में अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने हल्के अंदाज में गहरी बातें कहीं। भारत को अमेरिका से करीबी पर करजई ने पुराने फिल्मी गीत ‘बाबूजी धीरे चलना... बडे़ धोखे हैं इस राह में’ के जरिए अनूठे अंदाज में चेताया। इसके लिए उन्होंने अपने देश का उदाहरण दिया जहां तमाम हस्तक्षेप के बाद भी शांति कायम नहीं की जा सकी।
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हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
भारत और अफगानिस्तान की पारंपरिक रिश्तों पर हुए सवाल पर करजई ने रवींद्रनाथ टैगोर की रचना ‘काबुलीवाला’ का उल्लेख किया और कहा कि इससे रिश्तों की गहराई को मापा जा सकता है, टैगोर ने ‘वॉशिंगटन वाला’ या कोई ‘और वाला’ पर कहानी नहीं लिखी, यह दोनों देशों के नागरिकों के रिश्तों की कहानी है।
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हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
‘मेरे प्यारे भारत के दोस्तों....’ इन पांच गर्मजोशी भरे शब्दों से अफगानिस्तान के दो दफा राष्ट्रपति रह चुके हामिद करजई की दोनों देशों के बीच सहयोग और दोस्ती के लिए मौजूदा खतरों पर चर्चा की। कहा यह पूरी तरह बेमेल गठबंधन है, उनकी कोई नीतियां नहीं हैं। 
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हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
‘मैं एक सकारात्मक व्यक्ति हूं और मानता हूं कि पाकिस्तान भी क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिए सोचेगा’, करजई नेइन शब्दों में पाकिस्तान से अपनी अपेक्षा जताई। उनके अनुसार यह अपेक्षा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई से है, तीनों देशों की जनता तो दोस्ती चाहती है। उन्होंने दावा किया कि नवाज शरीफ भी भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं। साथ ही साफ किया कि पाकिस्तान की ओर से उन्हें अभी ऐसा कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष संकेत नहीं मिला है, वे यह बात सकारात्मकनजरिए से कह रहे हैं।
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