सरकारी धन किस तरह से ठिकाने लगाया जाता है, आगरा में एमजी रोड पर कराई गई पेटिंग इसका ताजा उदाहरण है। स्कूली बच्चों और स्वयंसेवी संगठनों की मदद से एमजी रोड किनारे की दीवारों पर पेंटिंग का जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) ने 15 करोड़ का बिल बना दिया है।
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वाल पेंटिंग
- फोटो : अमर उजाला
यह भुगतान आगरा विकास प्राधिकरण की पथकर निधि से कराने के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा है। इसको देखकर खुद अधिकारियों के सिर चकरा गए हैं।
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एमजी रोड की सूरत बदलने के लिए प्रशासन ने स्वयंसेवी संगठनों और वाइस आफ स्कूल एसोसिएशन के सहयोग से वॉल पेंटिंग के लिए अभियान चलाया था। अलग-अलग चरणों में विभिन्न संगठनों और विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपना योगदान देकर दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग बनाईं।
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11 नवंबर को 50 स्कूलों के 1500 छात्र-छात्राओं ने घंटों मेहनत कर भगवान टाकीज चौराहा से प्रतापपुरा तक की एमजी रोड किनारे की दीवारों पर सुंदर-सुंदर आकृतियां उकेरी। इनमें से अधिकांश सामग्री स्वयंसेवी संगठनों और विद्यालयों के माध्यम से ही जुटाई गई थी।
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स्वयं प्रशासन ने भी इस अभियान से पहले पांच नवंबर को कलक्ट्रेट में बैठक कर घोषणा की थी कि मामूली मरम्मत कार्य के बाद यह अभियान स्वयंसेवी और विद्यालयों की मदद से चलाया जाएगा। डूडा ने इसी मामूली मरम्मत और पेंटिंग पर 15 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया है।
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उसने इसके भुगतान के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भी भेजा है। मगर, ये बात किसी के गले नहीं उतर रही। जब स्कूली बच्चे और स्वयंसेवी संगठन पेंटिंग का सामान अपने साथ लेकर आए थे तो डूडा ने इतना बिल किस आधार पर बना दिया।
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मामले में आगरा के जिलाधिकारी गौरव दयाल का कहना है कि प्रस्ताव में टाइप करते समय टाइपिंग में गलती हो गई थी। 15 लाख रुपये के स्थान पर 15 करोड़ रुपये टाइप हो गया था। इसे बाद में ठीक करा दिया गया है।
वाइस आफ स्कूल्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डा. राहुल राज ने बताया कि 50 स्कूलों के 1200-1500 बच्चों ने अभियान में शिरकत की थी। तीन घंटे पेंटिंग की थी। स्कूलों ने प्रत्येक बच्चे को ब्रुश और पेंट उपलब्ध कराया था।