मथुरा में शुक्रवार दोपहर को हुए हादसे ने एक बार फिर स्कूल प्रबंधन को कठघरे में खड़ा कर दिया। महोली रोड पर हुए हादसे के बाद यह साबित हो गया कि निजी स्कूल सीबीएसई, सीआईएससीई और स्कूल बसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। शीर्ष आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए, मासूमों की जान से खिलवाड़ की जा रही है।
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स्कूल बस
- फोटो : अमर उजाला
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मथुरा के सेंट डामिनिक्स स्कूल के बच्चे जिस बस में घर जा रहे थे वह कितनी खस्ता हालत में थी। और तो और बस पर नाम भी किसी दूसरे स्कूल का पड़ा है। जिससे साफ है कि स्कूल प्रबंधन ने बिना जांचे परखे ही दूसरी बस में बच्चों को भेज दिया।
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स्कूल बस
- फोटो : अमर उजाला
हादसे के बाद बस के ड्राइवर ने बताया कि गाड़ी का एक्सल टूटने से वह हादसे का शिकार हो गई। इससे साफ है कि बसों में तकनीकी कमी को नजरअंदाज कर उसे बच्चों को लाने ले जाने के काम में लगा दिया था।
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स्कूल बस
- फोटो : अमर उजाला
हादसा भी इतना भीषण था कि बस के शीशे चकनाचूर हो गए। उसके इंजन में से धुंआ भी निकलने लगा। ऐसे में दोपहर के समय अगर बस में आग लग जाती और हादसे की भयावहता का अंदाज नहीं किया जा सकता है।
गनीमत यह रही बस में सवार बच्चों को ज्यादा चोट नहीं आईं। केवल दो बच्चों की हालत ही गंभीर बताई जा रही है। मामले में प्रशासन ने बस की हालत को लेकर स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया है।