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आगरा का रामबाग: पानीपत युद्ध जीतने के बाद बाबर ने बनवाया था ये बगीचा, जहां अंग्रेज मनाते थे हनीमून; तस्वीरें

Sat, 02 May 2026 11:32 AM IST
Dhirendra Singh अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के रामबाग ने 500 साल पूरे कर लिए हैं, जिसे मुगल बादशाह बाबर ने चारबाग शैली में बनवाया था और यह भारत के सबसे प्राचीन मुगल उद्यानों में से एक माना जाता है। यमुना किनारे स्थित यह ऐतिहासिक बाग मुगल स्थापत्य, जल प्रबंधन और उद्यान कला का अनोखा उदाहरण है, जिसे अब धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा रहा है।
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रामबाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
 यमुना नदी के किनारे समरकंद की चारबाग शैली में मुगल बादशाह बाबर के बनवाए गए रामबाग (बाग ए हिश्त-बहिश्त) ने 500 साल पूरे कर लिए हैं। पानीपत के पहले युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराने के बाद बाबर मई, 1526 में आगरा पहुंचा तो गर्मी से बेहाल हो गया। उसी दौरान चारबाग शैली में बगीचे का निर्माण शुरू कराया। गर्मी से निपटने के लिए इस बाग में ऐसे इंतजाम किए गए कि मई-जून की गर्मी में भी ठंड का एहसास हो। मुगलों ने इसी बगीचे की तर्ज पर यमुना किनारे 32 खंभा से ताजमहल तक 48 हवेलियों और बगीचों का निर्माण कराया था।

500 साल पहले आगरा आए बाबर ने मई 1526 में जब रामबाग की शुरुआत की तो अपनी आत्मकथा में उद्यान के बारे में पूरा ब्योरा दिया है। इसमें बताया गया कि बाग में जल प्रपात, नहरें, बड़ा कुआं, हम्माम बनवाए गए। रामबाग के भूमिगत कक्षों में यमुना की ओर से आती ठंडी हवाओं के कारण दिन में भी फुरफुरी दौड़ने लगती है। वहीं बगीचे में नहरों के कारण लू का प्रकोप खत्म हो जाता था। इमली के पेड़, नहरें और अष्टकोणीय तालाब यहां अब भी मौजूद हैं। गेंदा, गुलाब, चंपा, चमेली, कनेर, अनार, चंदन के पौधे लगवाए। ग्वालियर से कनेर की पौध मंगवाई गई थी।

 
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रामबाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रामबाग से शुरू हुआ बगीचों का सफर
एएसआई के पूर्व निदेशक और पद्मश्री से सम्मानित पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने बताया कि 500 साल पहले मुगल बादशाह ने बाग-ए-हिश्त-बहिश्त यानी रामबाग की नींव डाली और फिर उसके बाद बगीचों का ऐसा सफर शुरू हुआ कि यमुना किनारे मुगल बादशाहों के दौर में 48 हवेलियों और बगीचों का निर्माण कराया गया। जयपुर के म्यूजियम में 17वीं सदी का नक्शा रखा है, जिसमें सभी रिवरफ्रंट गार्डन का ब्योरा दिया गया है। बाबर ने इसके बाद इससे सटा हुआ जोहरा बाग बनवाया और उसके आगे बेटी के नाम पर अचानक बाग बनवाया था।
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रामबाग की पुरानी तस्वीर - फोटो : asi
ऐसा नाम कि अंग्रेजों ने हनीमून का बनाया ठिकाना
ऑस्ट्रियाई इतिहासकार एवा कोच ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि नहरों, कुओं और यमुना किनारे बने चारबाग शैली के रामबाग में गर्मी में भी फुरफुरी दौड़ने का ऐसा प्रचार हुआ कि ब्रिटिशकाल में अंग्रेजों ने इसे हनीमून के लिए उपयोग करना शुरू कर दिया। अंग्रेज अफसर छुट्टी मनाने के लिए रामबाग आते थे।

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रामबाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ब्रिटिशकाल में मुख्य इमारत के ऊपर एक और भवन बनवाया गया जो बाद में टूटकर गिर गया। तब इसकी बुकिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था और 15 दिनों से ज्यादा कोई नहीं ठहर सकता था। यहां ऐसे फलदार पेड़ लगाए गए, जो आगरा की जलवायु में नहीं उगते। सेब, खुबानी, अखरोट, आड़ू, नाशपाती यहां नजर आते थे।
 
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इंटरप्रिटेशन सेंटर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
500 साल का इतिहास बयां करेगा सेंटर
रामबाग के 500 साल पूरे होने के मौके पर इसी माह प्रवेश द्वार पर ही इंटरप्रिटेशन सेंटर की शुरुआत की जाएगी। इस सेंटर में समरकंद के चारबाग शैली में बनाए गए रामबाग का पूरा ब्योरा दिया गया है। बाबर के बनाए बाग को वर्ष 1621 में जहांगीर ने बाग-ए-नूर अफशां का नाम दिया और कुछ मंडप जोड़े। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिथा कुमार ने बताया कि इसी महीने इंटरप्रिटेशन सेंटर शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। सेंटर का काम लगभग पूरा हो चुका है।

 
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रामबाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
क्या है चारबाग शैली
चारबाग शैली एक फारसी-इस्लामी उद्यान वास्तुकला है, जिसमें एक वर्गाकार या आयताकार बगीचे को पानी की नहरों या पैदल रास्तों द्वारा चार बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। मुगलों द्वारा भारत लाई गई इस शैली में केंद्र में मुख्य इमारत (मकबरा या महल) होती है, जिसके चारों ओर क्यारियां और फव्वारे होते हैं।
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