188 दिनों तक ताजमहल बंदी के कारण सबसे बुरे दौर से गुजर रहे ताजनगरी के पर्यटन उद्योग को सहारा, सुविधाएं देने की जगह प्रदेश सरकार ने 167 करोड़ रुपये की योजनाएं छीन ली हैं। वर्ल्ड बैंक की मदद से चलाई जा रही प्रो-पूअर टूरिज्म प्रोजेक्ट में आगरा-मथुरा से 167 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट निरस्त कर सारनाथ-कुशीनगर को दे दिए गए। आगरा-मथुरा में इन योजनाओं के लिए टीटीजेड अथॉरिटी और अन्य विभागों से अनुमति नहीं मिल पाई। इनमें ताजमहल पश्चिमी गेट पार्किंग, विजिटर सेंटर, पूर्वी गेट ताजखेमा के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
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बटेश्वर में यमुना किनारे स्थित मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने महानिदेशक पर्यटन को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि आगरा-मथुरा में किए जाने वाले कार्य अब सारनाथ और कुशीनगर में कराए जाएंगे। प्रमुख सचिव ने लिखा है कि आगरा मथुरा में होने वाले 167 करोड़ के कार्य की जगह सारनाथ में 130 करोड़ और कुशीनगर में 37 करोड़ के पर्यटन विकास कार्य कराए जाएंगे।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी गेट पार्किंग, ताज खेमा, 11 कुंड की योजनाएं बंद
प्रो. पूअर पर्यटन के तहत ताजमहल पश्चिमी गेट पार्किंग, विजिटर सेंटर पर 107 करोड़, ताज पूर्वी गेट ताजखेमा पर 15 करोड़, मथुरा में 11 कुंडो पर 35 करोड़, फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट पर 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन इनकी जगह सारनाथ में विजिटर सेंटर, वेंडिंग जोन, आर्टिजन सेंटर, साइनेज, स्ट्रीट लाइटिंग, भूमिगत बिजली केबल, गोल्फ कार्ट, सीसीटीवी, वाईफाई, एलईडी आदि पर 130 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कुशीनगर में बाकी 37 करोड़ से विपश्यना केंद्र, रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, विजिटर सेंटर, फुट ओवर ब्रिज, गेस्ट हाउस, राजकीय बौद्व संग्रहालय बनाया जाएगा। आगरा किला में लाइट एंड साउंड शो के लिए तीन करोड़ रुपये बजट का प्रस्ताव पर्यटन विभाग ने तैयार किया था। इसे विश्व बैंक ने मंजूरी नहीं दी थी।
वर्ल्ड बैंक ने 371.13 करोड़ रुपये की दी थी स्वीकृति
वर्ल्ड बैंक ने प्रो-पूअर टूरिज्म योजना के लिए आगरा क्षेत्र में गरीब व्यक्तियों के लिए रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट पर 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर की योजना पर सहमति दी थी, जिसमें 70 फीसदी लोन और 30 फीसदी राज्य सरकार का अंशदान होना था, लेकिन 2017 में प्रदेश सरकार 57 मिलियन डॉलर यानी 371.13 करोड़ रुपये की योजनाएं ही बनाकर सहमति ले सकी। इसमें से ताज के पास कछपुरा, शाहजहां गार्डन का सुंदरीकरण की योजनाएं तो पूरी कर पाई, लेकिन अन्य योजनाओं को टीटीजेड अथॉरिटी और अन्य जगहों से अनुमति नहीं मिल पाई।
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मार्बल के बने ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
अन्य शहरों का विकास हो पर ताज की कीमत पर नहीं
तीन साल से ताजमहल के नाम पर एक भी पर्यटन योजना प्रदेश और केंद्र सरकार ने नहीं दी है। ताज को उपेक्षित किया है, लेकिन पर्यटक केवल ताज देखना चाहते हैं। प्रदेश सरकार अन्य शहरों का पर्यटन विकास करे, लेकिन ताजमहल की कीमत पर नहीं। - शमशुद्दीन, अध्यक्ष, आगरा एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन
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ताजमहल
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योजना निरस्त करना ठीक नहीं
आगरा की पर्यटन योजनाओं को निरस्त कर किसी दूसरे शहर को देना गलत है। सरकार उन सर्किटों को विकसित करे, लेकिन ताजमहल के पास की योजनाएं खत्म करके नहीं। पार्किंग वहां नहीं, तो किसी अन्य जगह बना देते, लेकिन योजना निरस्त करना ठीक नहीं - दीपक दान, अध्यक्ष, यूपी टूरिज्म गाइड एसोसिएशन
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भारी पड़ी
तीन साल से ताज को उपेक्षित किया जा रहा है। कोई एक प्रोजेक्ट हो, जो प्रदेश सरकार ने दिया हो। हमारे जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पहले भी भारी पड़ी है। अब भी भारी पड़ रही है। स्टेडियम, थीम पार्क समेत कोई योजना यहां से दूसरे शहर दे दी जाती है। - संदीप अरोड़ा, अध्यक्ष, आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन
टीटीजेड की शर्तों को आसान कराएं
ताजनगरी के लिए यह बड़ा झटका है। जनप्रतिनिधियों को पैरवी कर टीटीजेड की शर्तों को आसान कराना चाहिए जिससे विकास की योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। - मनीष अग्रवाल, संपर्क प्रमुख, लघु उद्योग भारती