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नौकरी छोड़ने के बाद फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कितने समय में होना चाहिए? यहां जानें नियम

Fri, 06 Nov 2026 01:04 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • F and F Settlement After Resignation: नौकरी छोड़ने के बाद फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की प्रक्रिया आम तौर पर 30 से 45 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए।
  • इसमें अंतिम सैलरी, बची हुई छुट्टियों का पैसा और नियमानुसार ग्रेच्युटी की रकम को जोड़कर भुगतान किया जाता है।
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नौकरी छोड़ने के बाद एफएंडएफ - फोटो : AI
Full and Final Settlement Rules: जब कोई कर्मचारी अपनी वर्तमान कंपनी को छोड़कर किसी दूसरी जगह जाने का फैसला करता है या इस्तीफा देता है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल फुल एंड फाइनल सेटलमेंट यानी 'एफएंडएफ' को लेकर होता है। हर कर्मचारी यह जानना चाहता है कि उसकी रुकी हुई सैलरी, बचा हुआ एनकैशमेंट और अन्य बकाए पैसे कंपनी द्वारा उसके बैंक खाते में कब तक ट्रांसफर किए जाएंगे। 

कई बार कंपनियों द्वारा हिसाब करने में महीनों की देरी कर दी जाती है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। श्रम कानूनों और कंपनी नियमों के मुताबिक, फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है। आइए इस लेख में इसके नियम जानते हैं।
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कितने दिनों में मिलता है पैसा? - फोटो : freepik
कितने दिनों में मिलता है पैसा?
  • भारतीय श्रम कानूनों और अधिकांश कंपनियों के आंतरिक नियमों के मुताबिक, नौकरी छोड़ने के बाद आम तौर पर 30 से 45 दिनों के भीतर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट पूरा हो जाना चाहिए।
  • इस तय सीमा के अंदर कर्मचारियों को उनका बकाया पूरा पैसा मिल जाना कानूनी रूप से अनिवार्य माना जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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कंपनी क्यों करती है देरी? - फोटो : Adobe Stock
कंपनी क्यों करती है देरी?
  • कई बार नोटिस पीरियड पूरा न होने, हैंडओवर प्रक्रिया में देरी या ड्यूज क्लीयरेंस पेंडिंग रहने के कारण कंपनियों को हिसाब करने में कुछ अधिक समय लग सकता है।
  • इसके अलावा, कंपनी के आंतरिक ऑडिट और वित्तीय दस्तावेजों की जांच में वक्त लगने पर भी भुगतान प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है।

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किन चीजों का होता है हिसाब? - फोटो : Adobe Stock
किन चीजों का होता है हिसाब?
  • इस फाइनल सेटलमेंट में कर्मचारी की आखिरी महीने की सैलरी, बची हुई पेड लीव का पैसा, ग्रेच्युटी और अन्य परफॉर्मेंस इंसेंटिव्स की पूरी राशि जोड़कर दी जाती है।
  • साथ ही, यदि कंपनी की तरफ से कोई कटौती या एडवांस लिया गया हो, तो उसे घटाकर अंतिम और सटीक राशि तय की जाती है।
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किन चीजों का होता है हिसाब? - फोटो : Adobe Stock
देरी होने पर क्या करें?
  • अगर कंपनी तय समय सीमा के बाद भी पैसे देने में आनाकानी करे, तो आप एचआर डिपार्टमेंट से लिखित शिकायत कर सकते हैं या श्रम विभाग की मदद ले सकते हैं।
  • आप चाहें तो लेबर कोर्ट में औपचारिक शिकायत दर्ज कराकर अपने कानूनी अधिकारों के तहत अपना बकाया पैसा ब्याज सहित वापस पाने की मांग भी कर सकते हैं।
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