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Explained: क्यों दुनिया के बड़े देश बढ़ा रहे अपना गोल्ड रिजर्व, क्या जारी रहेगी सोने की कीमतों में बढ़ोतरी?

Fri, 23 Jan 2026 07:37 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Gold Price: सोने की कीमतें अचानक नहीं बढ़ रहीं बल्कि इसके पीछे दुनिया की बड़ी महाशक्तियों और संकटों की कहानी छिपी हुई है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि गोल्ड महंगा क्यों हो रहा है, असली सवाल यह है कि क्या यह तेजी आने वाले बड़े बदलाव का संकेत है?
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Gold - फोटो : Amar Ujala
Will Gold Price Increase: बीते कुछ वर्षों में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं रहा है बल्कि यह ग्लोबल पॉलिटिक्स, वॉर और इकोनॉमिक अनसर्टेनिटी का सबसे भरोसेमंद पैमाना बनकर उभरा है। निवेशकों से लेकर दुनियाभर के सेंट्रल बैंक हर कोई सोने को सेफ हेवन के रूप में आज के सयम देख रहे हैं। भारत इसका एक बड़ा उदाहरण है, जहां 2020 में हमारा गोल्ड रिजर्व 661 टन था। वह 2025 में बढ़कर 879 टन हो गया। सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई देश अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों के ट्रेन्ड को देखें तो गोल्ड ने काफी ज्यादा रिटर्न दिया है।

इसने इसे शेयर बाजार और अन्य एसेट क्लास से अलग खड़ा कर दिया है। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है? दुनिया में जब भी युद्ध और अस्थिरता का माहौल बनता है तो सोने की कीमतें रिकॉर्ड तेजी से क्यों बढ़ने लगती हैं? क्या यह केवल एक पारंपरिक सोच है या इसके पीछे कोई गहरी ऐतिहासिक और राजनीतिक वजह है? क्या आने वाले समय में सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी होगी या ये तेजी सिर्फ अस्थायी है? आइए जानते हैं इन सब के बारे में विस्तार से -
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Why gold price increasing - फोटो : Amar Ujala

सेंट्रेल बैंक बड़े पैमाने पर खरीद रहे गोल्ड

  • सोने की कीमतों में हो रही रिकॉर्ड तेजी का एक बड़ा कारण सेंट्रल बैंकों की खरीदारी है।
  • साल 2022 से 2024 के बीच दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने करीब 3200 टन सोना खरीदा है और इस लिस्ट में रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देश सबसे आगे हैं।
  • ये देश धीरे धीरे अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी कम कर रहे हैं और उसकी जगह गोल्ड को प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि सोने की डिमांड सिर्फ लोगों के बीच नहीं है बल्कि यह दुनियाभर की सरकारों की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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Why gold price increasing - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी

अनिश्चितता के दौर में क्यों खरीदा जाता है सोना? 

  • दुनिया में जब युद्ध या बड़ा संकट देखने को मिला है तब सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आई है।
  • 1970 के दशक में ईरान रिवोल्यूशन, सोवियत यूनियन का अफगानिस्तान पर हमला और योम किपूर वॉर के दौरान सोने और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं।
  • इसी तरह साल 2008 का लेहमन ब्रदर्स फाइनेंशियल क्राइसिस हो या 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध, हर बड़े अस्थिर इवेंट के बाद निवेशकों ने सोने की ओर रुख करना पसंद किया।
  • अनिश्चितता के समय लोग ऐसी संपत्ति चाहते हैं, जो अपनी वैल्यू बनाए रखे और सोना इनमें से एक है।

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Why gold price increasing - फोटो : Amar Ujala

ब्रेटन वुड्स और गोल्ड की कहानी

  • युद्ध और अस्थिरता का सोने से गहरा रिश्ता है। इसका संबंध साल 1944 के ब्रेटन वुड्स एग्रीमेंट से जुड़ा है।
  • दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका के पास दुनिया का लगभग 66 प्रतिशत गोल्ड रिजर्व था।
  • इसी ताकत के दम पर डॉलर को दुनिया की रिजर्व करेंसी बनाया गया और हर डॉलर के पीछे गोल्ड की गारंटी दी गइ।
  • इस सिस्टम ने डॉलर पर वैश्विक भरोसा कायम किया।
  • लंबे समय तक इंटरनेशनल ट्रेड डॉलर और गोल्ड से जुड़ा रहा।
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Why gold price increasing - फोटो : Amar Ujala

निक्सन शॉक

  • इसके बाद साल 1971 में ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।
  • अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ज निक्सन ने डॉलर को गोल्ड से अलग कर दिया, जिसे निक्सन शॉक कहा जाता है।
  • इस फैसले के बाद अमेरिका को मनचाहा पैसा छापने की आजादी मिल गई।
  • इसका असर यह हुआ कि कई देशों का डॉलर पर भरोसा कमजोर होने लगा।
  • इसी दौर में 1971 से लेकर 1980 के बीच गोल्ड की कीमतें 38 डॉलर प्रति आउंस से बढ़कर 636 डॉलर प्रति आउंस के करीब पहुंच गईं।
  • महज नौ वर्षों में इतनी बड़ी उछाल ने यह बताया कि सोने को सेफ हेवन कियों कहा जाता है।
  • सोने की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह अर्थव्यवस्था के चौपट होने पर भी अपनी वैल्यू नहीं खोता।
  • यही वजह है कि इसे सेफ हेवन कहा जाता है।
  • गल्फ वॉर, इराक क्राइसिस, 9/11 अटैक और 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट हर बड़ी अस्थिरता के समय निवेशकों ने गोल्ड को ही प्राथमिकता दी। 
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Why gold price increasing - फोटो : ANI

डॉलर सिस्टम पर क्यों बढ़ रहा डर?

  • बीते कुछ वर्षों में एक और ट्रेंड देखने को मिल रहा है।
  • यूएस डॉलर पर कई देशों का भरोसा कम हो रहा है।
  • रूस, चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश अपनी यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स को कम कर रहे हैं।
  • 2022 में रूस यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा रूस के लगभग 300 बिलियन डॉलर के रिजर्व फ्रीज कर दिया गया था।
  • इससे कई देशों को झटका लगा, उन्हें यह डर सताने लगा कि अगर आज रूस के साथ ऐसा हो सकता है, तो कल किसी और के साथ भी हो सकता है। 
  • इसी डर ने दुनिया को गोल्ड की ओर और मजबूती से मोड़ा है।
  • गोल्ड ऐसा एसेट है, जिसे न तो आसानी से फ्रीज किया जा सकता है और न ही इसकी वैल्यू किसी एक देश की पॉलिसी पर निर्भर करती है।
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Why gold price increasing - फोटो : Amar Ujala

गोल्ड बबल क्या है और क्यों जरूरी है सतर्कता

  • जियोपॉलिटिकल टेंशन जैसे जैसे बढ़ रही है और ग्लोबल पावर बैलेंस बदल रहा है, वैसे वैसे गोल्ड को एक भरोसेमंद एस्केप प्लान के रूप में देखा जा रहा है।
  • यह केवल निवेश नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक सेफ्टी की गारंटी बन रहा है। 
  • आने वाले समय में अगर दुनिया में युद्ध, राजनीतिक टकराव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने की कीमतों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।
  • हालांकि, इन सब के बीच आपको गोल्ड बबल का खतरा भी समझना काफी जरूरी है।
  • किसी एसेट में जरूरत से ज्याद पैसा लगाया जाता है, तो कीमतें उसकी वास्तविक वैल्यू से ऊपर चली जाती हैं इसे बबल कहा जाता है।
  • यह गोल्ड के साथ भी हमें देखने को मिल रहा है।
  • कल को अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होती है, डॉलर मजबूत होता है या दुनियाभर के केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी को घटाते हैं तो इसमें तेजी से गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
  • ऐसे में आपको निवेश से पहले संतुलन और लॉन्ग टर्म नजरिया सोचना जरूरी है।
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