आज के समय देश के कई शहरों में मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं। हालांकि, दिल्ली शहर में इसका विशाल नेटवर्क फैला हुआ है। इस कारण दिल्ली मेट्रो को शहर की लाइफ लाइन भी कहा जाता है। दिल्ली में ज्यादातर लोग गाड़ी से ट्रैवल करने की बजाए मेट्रो ट्रेन का ही चुनाव करते हैं। इससे लंबे ट्रैफिक जाम में उन्हें नहीं फंसना पड़ता है, जिसकी वजह से समय की काफी बचत होती है। आज के समय दिल्ली मेट्रो की गिनती देश के सबसे व्यस्त और कुशल परिवहन के साधनों में की जाती है।
इसमें सफर करना भी काफी आसान और सुविधाजनक है। इस कारण यात्रियों को सफर करते समय किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए कई नियमों को भी बनाया गया है। इस कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि मेट्रो केवल ट्रांसपोर्ट प्रणाली ही नहीं है बल्कि यह हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
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मेट्रो
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अक्सर जब यह सवाल किया जाता है कि भारत की सबसे पहली मेट्रो ट्रेन कहां और कब चली थी? तो कई लोग दिल्ली का नाम लेते हैं, जो कि गलत है। भारत की पहली मेट्रो ट्रेन 24 अक्तूबर, 1984 को कोलकाता में चली थी।
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मेट्रो
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कोलकाता में मेट्रो ट्रेन चलाने की रूपरेखा 13 साल पहले यानी 1971 में ही तैयार कर ली गई थी। इसके बाद 1 जून 1972 को इस परियोजना को मंजूरी दी गई। 12 साल तक कोलकाता में मेट्रो बनाने का कार्य किया गया। इसके बाद साल 1984 में कोलकाता में पहली मेट्रो चली।
इस दौरान कोलकाता में कुल 3.4 किलोमीटर की मेट्रो लाइन बनाई गई थी। इस लाइन पर मेट्रो एस्प्लानेड से भवानीपुर तक चलती थी। इसके बाद समय के साथ-साथ इस मेट्रो लाइन का भी विस्तार किया गया।
वहीं आज के समय दिल्ली मेट्रो देश का सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क बन चुका है। आज के समय इसका नेटवर्क दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव, बहादुरगढ़ और वल्लभगढ़ तक करीब 350 किलोमीटर तक फैल चुका है।