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AQI: दिवाली के बाद दिल्ली-NCR की हवा बनी जहर, क्या होता है AQI और कैसे मापा जाता है हवा में प्रदूषण का स्तर?

Tue, 28 Oct 2025 12:05 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बीते वर्षों में बढ़ते औद्योगीकरण, वाहनों के धुएं, निर्माण कार्य, पराली जैसी समस्याओं के चलते हवा की गुणवत्ता काफी खराब हुई है। इस कारण सर्दियों के सीजन में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम आदि जगहों पर AQI कई बार खतरनाक श्रेणी में चला जाता है।
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AIR Pollution - फोटो : Adobe Stock
दिवाली के बाद दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर काफी भयावह हो चुका है। बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली एनसीआर में ग्रेप 2 की पाबंदियां लगाई गई हैं। प्रदूषण के बढ़ने से लोगों को कई तरह की श्वास संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका नकारात्मक असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

क्या होता है AQI?

हवा की गुणवत्ता को मापने के लिए एक खास तरह का पैमाना बनाया गया है, जिसे AQI यानी Air Quality Index कहा जाता है। एक्यूआई हमें इस बारे में बताता है कि किसी शहर की हवा कितनी स्वच्छ और प्रदूषित है। बीते वर्षों में बढ़ते औद्योगीकरण, वाहनों के धुएं, निर्माण कार्य, पराली जैसी समस्याओं के चलते हवा की गुणवत्ता काफी खराब हुई है। इस कारण सर्दियों के सीजन में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम आदि जगहों पर AQI कई बार खतरनाक श्रेणी में चला जाता है। AQI के जरिए लोगों को यह पता चलता है कि बाहर की हवा कितनी शुद्ध है और बाहर निकलना हमारे लिए कितना सुरक्षित है?
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AIR Pollution - फोटो : Adobe Stock
AQI को वायु गुणवत्ता सूचकांक के नाम से भी जाना जाता है। एक्यूआई को कुल 6 कैटेगरी में बांटा गया है, जो कि निम्नलिखित हैं। 
  • 0-50 = शुद्ध हवा है
  • 51-100 = संतोषजनक हवा है
  • 101-200 = मध्यम
  • 201-300 = खराब हवा है
  • 301-400 = बेहद खराब हवा है
  • 410-500 = गंभीर श्रेणी 
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AIR Pollution - फोटो : Adobe Stock
एक्यूआई में इन 6 प्रदूषक तत्वों (PM2.5, PM10, NO2, SO2, CO और O3) का अध्ययन किया जाता है। हवा में मौजूद इन प्रदूषक तत्वों की मात्रा को मापकर एक्यूआई की गणना की जाती है। सरकार अलग अलग जगहों पर हवा की गुणवत्ता मापने वाले मीटर को लगाती है। इन दिनों प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए नए उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। 

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AIR Pollution - फोटो : Adobe Stock
अगर एक्यूआई खराब है तो इस स्थिति में श्वास संबंधी बीमारी, हृदय रोग, फेफड़ों की समस्या होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस दौरान कई लोगों को आंखों में जलन भी महसूस होती है। इसका सबसे बुरा प्रभाव बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिलता है।  
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Air Pollution - फोटो : Freepik
प्रदूषण का स्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है उसे देखते हुए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर कई कदम उठाने जरूरी हैं। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, पौधारोपण, ऊर्जा के स्वच्छ स्त्रोतों को अपनाना आदि। इसके अलावा सरकार को भी इस दिशा में कई ठोस कदम उठाने की जरूरत है।  

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