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UPI: भारत में यूपीआई की सफलता खींच रही दुनिया का ध्यान, ग्लोबल करने पर चल रही तैयारी

Sun, 21 May 2023 05:33 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वॉयस-आधारित पेमेंट सिस्टम UPI - फोटो : सोशल मीडिया
यूपीआई ने भारत के डिजिटल ट्रांजैक्शन के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति लाया है। एक समय था जब देश में यूपीआई की दस्तक के बाद इसकी असफलता के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, इसके आने के बाद देश के डिजिटल ट्रांजैक्शन के क्षेत्र में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली है। आज के समय देश भर में बड़े पैमाने पर लोग एनपीसीआई द्वारा तैयार किए गए यूपीआई सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। यूपीआई के आने से डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में जो वृद्धि हुई है। उसका एक सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष के आखिरी महीने मार्च में यूपीआई से हुए लेनेदेन 14 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गए। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यूपीआई ने देश के डिजिटल पेमेंटिंग के इकोसिस्टम को एक नया रूप दिया है। 
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mobile new - फोटो : istock
वहीं साल 2022 में यूपीआई से 82 लाख करोड़ रुपये का लेन देन हुआ। इस साल यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। भारत में यूपीआई की सफलता को देखते हुए कई दूसरे देश भी इससे प्रेरित हो रहे हैं। 
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mobile new - फोटो : istock
भारत देश में यूपीआई की इस सफलता के पीछे का सबसे बड़ा कारण एक सिंपलीफाइड पेमेंट सिस्टम का होना है। यूपीआई आने से पहले जहां हमें एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पैसे भेजने के लिए अकाउंट नंबर, IFSC कोड आदि जानकारी को दर्ज करना होता था। वहीं यूपीआई आने के बाद अब हम महज क्यूआर कोड स्कैन या मोबाइल नंबर दर्ज करके सीधे व्यक्ति के खाते में पैसे भेज सकते हैं। 

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mobile new - फोटो : istock
यूपीआई की सफलता का एक सबसे बड़ा कारण इसका लोकतांत्रिक परिवेश होना भी है। आज के समय एक अमीर शख्स से लेकर देश के सीमांत इलाकों में रहने वाले लोग भी यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। 
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mobile new - फोटो : istock
यूपीआई की इन्हीं सफलता को देखते हुए यूपीआई को ग्लोबल करने की भी बात चल रही है। यूपीआई का दूसरे देशों में कैसे विस्तार किया जा सकता है? इस पर योजनाएं बननी शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में सिंगापुर के पेमेंट सिस्टम से भी युपीआई जुड़ चुका है। लोग अब तीन प्रतिशत की फीस पर पैसे भेज सकते हैं। भारत की योजना है कि यूपीआई को दुनिया के बाकि देशों में पमेंट के विकल्प के रूप में मंजूरी मिले। 
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