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Zero FIR: क्या होता है जीरो एफआईआर? यहां जानें इसके कानूनी दांव-पेंच

Fri, 15 May 2026 05:39 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Police Complaint Procedure: अक्सर लोग जानकारी के आभाव में सही समय पर सही कार्रवाई नहीं कर पाते हैं, जिसकी वजह से जिससे न्याय मिलने में बाधा आती है। जीरो एफआईआर के बारे में बहुत कम लोगों को मालूम होता है, इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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जिरो एफआईआर (FIR) क्या होता है? - फोटो : AI
What is ZERO FIR?: 'जीरो एफआईआर' एक ऐसा महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है जो पीड़ित को किसी भी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराने की अनुमति देता है, चाहे अपराध उस क्षेत्र में हुआ हो या नहीं। कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी न होने के कारण अक्सर लोग अपराध की सूचना देने में देरी कर देते हैं, जिससे न्याय मिलने में बाधा आती है।  

यह व्यवस्था विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों और गंभीर घटनाओं में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत पुलिस क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर शिकायत दर्ज करने से मना नहीं कर सकती है। आइए इस लेख में जीरो एफआईआर का कानूनी दांव-पेंच समझते हैं।
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जीरो एफआईआर की मुख्य विशेषताएं - फोटो : AI
जीरो एफआईआर की मुख्य विशेषताएं
  • आप देश के किसी भी कोने में स्थित पुलिस थाने में जाकर जीरो एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं।
  • इसका मुख्य उद्देश्य घटना के तुरंत बाद शुरुआती साक्ष्य जुटाना और अपराधी को भागने से रोकना होता है।
  • सामान्य एफआईआर के विपरीत, इसमें कोई स्थायी सीरियल नंबर नहीं दिया जाता, बल्कि इसे '0' (जीरो) नंबर से दर्ज किया जाता है।
  • प्राथमिक जांच के बाद, पुलिस इस एफआईआर को संबंधित क्षेत्र के थाने में भेज देती है जहां अपराध हुआ था।
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आम जनता के लिए इसके कानूनी लाभ - फोटो : अमर उजाला
आम जनता के लिए इसके कानूनी लाभ
  • 'क्षेत्राधिकार' तय करने के चक्कर में जो कीमती समय बर्बाद होता है, जीरो एफआईआर उसे बचाती है।
  • सड़क दुर्घटना या हत्या जैसे गंभीर मामलों में यह कानून पीड़ितों के लिए वरदान साबित होता है।
  • कोई भी पुलिस अधिकारी जीरो एफआईआर लिखने से मना नहीं कर सकता, मना करने पर अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
  • अन्य एफआईआर की तरह, इसमें भी पीड़ित को जीरो एफआईआर की एक प्रति मिलती है।

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एफआईआर दर्ज कराते समय रखें ये सावधानियां - फोटो : Adobe Stock
एफआईआर दर्ज कराते समय रखें ये सावधानियां
  • शिकायत दर्ज कराते समय अपना कोई भी वैध पहचान पत्र (जैसे वोटर आईडी या अन्य) जरूर साथ रखें।
  • जीरो एफआईआर में घटना का समय, स्थान और आरोपियों का हुलिया (अगर ज्ञात हो) पूरी स्पष्टता के साथ लिखवाएं।
  • पुलिस द्वारा लिखी गई शिकायत को ध्यान से पढ़ें और संतुष्ट होने पर ही उस पर हस्ताक्षर करें।
  • अपराध होने के बाद जितनी जल्दी संभव हो, नजदीकी थाने में पहुंचकर सूचना दें।
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जीरो एफआईआर के बाद की प्रक्रिया - फोटो : Adobe Stock
जीरो एफआईआर के बाद की प्रक्रिया
  • जब जीरो एफआईआर संबंधित थाने में पहुंचती है, तो वहां इसे एक नया सीरियल नंबर देकर रेगुलर एफआईआर में बदल दिया जाता है।
  • संबंधित थाना अपनी जांच शुरू करने के लिए एक जांच अधिकारी (IO) नियुक्त करता है।
  • अगर पुलिस सहयोग न करे, तो तुरंत किसी कानूनी विशेषज्ञ या वकील से संपर्क कर उच्चाधिकारियों को सूचित करें।
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