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किन स्थितियों में बैंक लोन सेटलमेंट का देता है विकल्प? यहां समझें इससे जुड़ी जरूरी बातें

Fri, 18 Sep 2026 08:39 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Loan Settlement Conditions: कई बार ऐसा होता है कि जब लोग लोन लेते हैं तो उसे न देने की स्थिति में बैंक उन्हें लोन सेटलमेंट का विकल्प देती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं कि लोन सेटलमेंट किन स्थितियों में होता है।
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बैंक लोन सेटलमेंट नियम - फोटो : AI
Bank Loan Settlement Option Rules: जब कोई आम इंसान अपनी खून-पसीने की कमाई के आधार पर बैंक का लोन लेता है, तो उसकी पूरी कोशिश होती है कि वह समय पर हर पाई चुका दे। लेकिन जिंदगी में कभी-कभी ऐसा मोड़ आ जाता है जब काम-धंधा ठप्प हो जाता है, नौकरी छूट जाती है, कोई गंभीर बीमारी घेर लेती है या परिवार में कोई बड़ा हादसा हो जाता है। ऐसी मजबूरी में जब हर महीने लोन की किश्त भरना नामुमकिन हो जाता है और सिर पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता चला जाता है, इस स्थिति में बैंक 'लोन सेटलमेंट' का रास्ता दिखाता है।

यह बैंक और आपके बीच का एक ऐसा समझौता होता है, जिसमें बैंक आपकी लाचारी देखकर मूल कर्ज में से कुछ हिस्सा माफ कर देता है और बची हुई थोड़ी रकम एक बार में जमा कराकर खाता बंद करने की छूट दे देता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि किन परिस्थितियों में बैंक आपको यह राहत देता है।
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जब लोन बन जाता है एनपीए - फोटो : Freepik
जब लोन बन जाता है NPA
 
  • जब कोई ग्राहक लगातार 90 दिनों तक लोन की किश्त नहीं भरता, तो बैंक उस खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित कर देता है।
  • इसके बाद, बैंक बकाया राशि वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई या रिकवरी एजेंटों की मदद लेता है।
  • जब बैंक को लगता है कि इन प्रयासों के बावजूद पूरा पैसा वसूलना मुश्किल या अत्यधिक समय लेने वाला है, तब वह अंत में ग्राहक को वन-टाइम सेटलमेंट या कॉम्प्रोमाइज सेटलमेंट का ऑफर देता है।
  • हालांकि, यह विकल्प पूरी तरह से बैंक की आंतरिक पॉलिसी और मामले की परिस्थितियों (जैसे कर्जदार की वास्तविक वित्तीय स्थिति) पर निर्भर करता है।
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अस्थायी के बजाय गंभीर और स्थाई समस्या होना - फोटो : Freepik
अस्थायी के बजाय गंभीर और स्थाई समस्या होना
  • ये समझना जरूरी है कि बैंक सिर्फ उन्हीं मामलों में सेटलमेंट के लिए तैयार होता है जहां ग्राहक अपनी वास्तविक लाचारी साबित कर देता है।
  • जैसे कि उधारकर्ता की अचानक मृत्यु, गंभीर बीमारी या दुर्घटना के कारण कमाने की क्षमता खत्म हो जाना।
  • ध्यान रखें अगर समस्या केवल 1-2 महीने की है, तो बैंक सेटलमेंट की जगह किश्तें टालने की मोहलत देता है।

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अनसिक्योर्ड लोन में मिलता है ज्यादा विकल्प - फोटो : Adobe Stock
अनसिक्योर्ड लोन में मिलता है ज्यादा विकल्प
  • लोन सेटलमेंट का विकल्प ज्यादातर क्रेडिट कार्ड बिल और पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन में ही दिया जाता है।
  • होम लोन या कार लोन जैसे सिक्योर्ड लोन में बैंक के पास आपकी संपत्ति गिरवी होती है, इसलिए बैंक सेटलमेंट करने के बजाय उस संपत्ति की नीलामी करके अपना पैसा वसूलता है।
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क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है बेहद बुरा असर - फोटो : Freepik
क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है बेहद बुरा असर
  • लोन सेटलमेंट भले ही आपको तात्कालिक राहत दे दे, लेकिन इसका आपके सिबिल स्कोर पर बहुत खराब असर पड़ता है।
  • आपके क्रेडिट रिपोर्ट में 'Loan Settled' दर्ज हो जाता है। इसका मतलब होता है कि आपने पूरा कर्ज नहीं चुकाया।
  • इस वजह से भविष्य में अगले कई वर्षों तक किसी भी बैंक से दोबारा लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
नोट- ध्यान रखें कि लोन सेटलमेंट कोई अनिवार्य कानूनी नियम या आपका अधिकार नहीं है। अगर कोई व्यक्ति इस सोच के साथ लोन लेता है कि पैसे न चुका पाने पर बैंक आसानी से सेटलमेंट कर देगा, तो यह बड़ी भूल हो सकती है। सेटलमेंट से पहले बैंक बकाये की वसूली के लिए हर संभव प्रयास करता है, जिसमें रिकवरी एजेंट, कानूनी नोटिस और संपत्ति जब्ती जैसी सख्त कोर्ट कार्रवाई भी शामिल है। बैंक केवल असाधारण और लाचार परिस्थितियों में ही इसे अंतिम विकल्प मानता है।
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