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Titanic Ship Incident: टाइटैनिक का मलबा देखने गए दौलतमंद खुद ही गुम हो गए, दुनिया के देश कर रहे तलाश

Thu, 22 Jun 2023 02:33 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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titanic submarine missing - फोटो : iStock

दुनिया के नक्शे पर 1912 में टाइटैनिक जैसे जहाज के डूबने की त्रासदी मनुष्य सभ्यता के इतिहास में कभी ना भूलने वाली एक दुर्घटना है। एक भव्य, विशाल और मनुष्य की नायाब व होशियार इंजीनियरिंग का यह नमूना जहाज पल भर के अंदर एक रात में समुद्र के अंदर खो गया। घटना घट गई और त्रासदी का यह हिस्सा दुनियाभर के लिए एक सबक बन गया। समंदर और टाइटैनिक का डूबना जहां हम पृथ्वीवासियों के लिए इतिहास की सबसे दुख से भरी सीख का हिस्सा है वहीं फिल्म, किताबों और दस्तावेजों के साथ पीढ़ियों के लिए कौतुहूल और जिज्ञासा का एक किस्सा।

टाइटैनिक के डूबने की कहानी

10 अप्रैल, 1912 यह वही दिन था, जब इंग्लैंड के साउथैम्पटन से न्यूयॉर्क सिटी के लिए टाइटैनिक अपने सफर की पहली शुरुआत करता है। यह कोई आम समुद्री जहाज नहीं था बल्कि अद्भुत इंजीनियरिंग का नायाब नमूना था। टाइटैनिक 20वीं सदी की शुरुआत में विलासिता, प्रगति और आलीशान सुविधाओं का प्रतीक था। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जहाज की बनावट के पीछे एक अद्भत इंजीनियरिंग काम कर रही थी। यही एक बड़ी वजह थी जिसके चलते इसे कभी न डूबने वाले जहाज (Unsinkable Ship) की संज्ञा दी गई। इस जहाज के कैप्टन का नाम एडवर्ड जे स्मिथ था। इनके जहाज में हमेशा दौलतमंद यात्री ही सफर करते थे। इस वजह से एडवर्ड को मिलियनेयर कैप्टन के नाम से भी जाना जाता था। खैर जो भी हो 10 अप्रैल, 1912 को 2240 पैसेंजर और क्रू मेंबर के साथ यह जहाज न्यूयॉर्क के लिए रवाना होता है।  
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titanic submarine missing - फोटो : iStock
सफर की शुरुआत के बाद 14 अप्रैल के दिन टाइटैनिक एक बड़े आइसबर्ग के पास पहुंचता है। हालांकि, इस बड़े हिमखंड को लेकर जहाज के कैप्टन को चेतावनी दी गई, जिसे उन्होंने नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने सोचा कि जहाज काफी बड़ा है और वह सुरक्षित आगे निकल जाएगा। हालांकि, चेतावनी आने के कुछ समय बाद ही यह जहाज उस बड़े हिमखंड से जा टकराया। इसके बाद देखते ही देखते कभी न डूबने वाला यह जहाज उत्तरी अटलांटिक महासागर में दफन हो गया। सदी के इस सबसे बड़े हादसे में करीब 1500 लोगों की जानें चली गईं। इस हैरतअंगेज घटना होने के बाद कई सालों तक समुद्र में दफन इस जहाज के मलबे को खोजने की कोशिश की गई। हालांकि, इस बड़ी दुर्घटना के 75 साल होने के बाद 1 सितंबर, 1985 को टाइटैनिक के मलबे को दोबारा ढूंढने में सफलता मिली।
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titanic submarine missing - फोटो : iStock
टाइटैनिक के मलबे की पहली तस्वीर जब सामने आई उसे देखने के बाद दुनिया आश्चर्चचकित हो गई। इस एक तस्वीर ने कई फिल्ममेकर्स को इस ऐतिहासिक घटना पर फिल्म बनाने के लिए प्रोत्साहित कर दिया। इसी सिलसिले में साल 1997 में जैम्स कैमरून ने इस घटना पर टाइटैनिक नाम से एक शानदार फिल्म बनाई। दुनिया भर में इस ब्लॉकबस्टर फिल्म ने जबरदस्त कमाई की। एक अनोखी प्रेम कहानी के समानांतर जिस तरह इस ऐतिहासिक घटना को सिनेमाई पर्दे पर दिखाया गया। उसने दर्शकों के चित्त पर टाइटैनिक जहाज हादसे को लेकर एक नई छाप छोड़ दी। 

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titanic submarine missing - फोटो : Twitter/Oceangate

बाहरहाल, यह टाइटैनिक एक बार फिर से चर्चा में है। वजह है इस भव्य जहाज के मलबे को देखने, तलाशने की कुछ अमीर और रसूखदार लोगों की जुनूनी इच्छा जो एक पनडुब्बी से इस जहाज के मलबे को ढूंढने तो निकले लेकिन समंदर के उन्हीं रहस्यमयी और अज्ञात हिस्सों में कहीं खो गए हैं जहां कभी टाइटैनिक खाक होकर गुम हो गया था। दुनियाभर के अखबारों और मीडिया की सुर्खियों में इन दिनों इन्हीं दौलतमंद सनकी और दुनियावी लोगों की खोज जारी है जो टाइटैनिक का मलबा देखने गए थे लेकिन खुद ही खो गए।

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Titanic Submarine - फोटो : Twitter/OceanGate
मध्य अटलांटिक महासागर में दफन टाइटैनिक मलबे को देखने गए 5 लोगों से भरी एक पनडुब्बी अचानक गुम हो गई। समुद्र में जाने के करीब एक घंटे 45 मिनट बाद ही इस पनडुब्बी से संपर्क टूट गया। यह एक खास तरह की रोमांच यात्रा थी, जिसमें पनडुब्बी के माध्यम से टाइनटैनिक के मलबे को दिखाना था। इस यात्रा की टिकट करीब 2 करोड़ रुपये थी। हालांकि, पनडुब्बी के गुम होने के बाद से उसकी तलाश जारी है। गौरतलब बात है कि इस पनडुब्बी में करीब 5 लोग सवार थे और उसमें केवल 4 दिन के लिए ही ऑक्सीजन बची है। 

अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि समुद्र में पनडुब्बी कहां लापता हुई है। अब लापता पनडुब्बी का पता लगाने के लिए एक खोज और बचाव अभियान की शुरुआत की गई है। लापता पनडुब्बी में पाकिस्तानी अरबपति शहजादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान, ब्रिटेन के व्यवसायी हामिश हार्डिंग, पनडुब्बी का संचालन करने वाली कंपनी ओशनगेट के सीईओ स्टॉकटन रश समेत पांच लोग सवार हैं। फ्रेंच एक्सप्लोरर पॉल आनरी नार्जेलेट भी इस पनडुब्बी में सवार हैं। 
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