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SWIFT System Explained: क्या है स्विफ्ट बैंकिंग सिस्टम? जानिए कैसे ये बर्बाद कर सकता है रूस की अर्थव्यवस्था

Tue, 01 Mar 2022 03:15 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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SWIFT Bank Explained - फोटो : Istock
रूस-यूक्रेन युद्ध एक गंभीर मोड़ ले चुका है। ये युद्ध आने वाले समय में विश्व को एक नए सिरे से परिभाषित करने का काम करेगा। रूसी सेना यूक्रेन की राजधानी कीव की घेराबंदी करने में लगी हुई है। हालांकि, यूक्रेन की तरफ से रूस को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ये युद्ध हर समय एक नया मोड़ लेता जा रहा है। रूस की इस सैन्य कार्रवाई के बाद यूनाइटेड किंगडम बड़े स्तर पर रूस को स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली से बाहर निकालने की अगुवाई कर रहा है। इसके अलावा यूक्रेन समेत कई पश्चिमी देश इस बात का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं कि रूस को स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली से बाहर किया जाना चाहिए। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते रूस के कुछ बैंकों को स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली से बाहर निकाल दिया गया है। इसी वजह से रूसी मुद्रा रूबल में एक बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि, अभी रूस को पूरी तरह से स्विफ्ट बैंक प्रणाली से बाहर नहीं निकाला गया है। अगर रूस को स्विफ्ट बैंक से बाहर निकाला जाता है, तो ये उसके ऊपर एक फाइनेंशियल न्यूक्लियर अटैक होगा, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो सकती है। इसी कड़ी में आज हम आपको बताएंगे कि क्या है स्विफ्ट बैंक और इससे बाहर निकाले जाने पर रूस की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
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SWIFT Bank Explained - फोटो : Istock

क्या है स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली

स्विफ्ट यानी सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन एक मैसेजिंग नेटवर्क है, जो कि बैंकों को एक खास तरह के कोड फॉर्म में मैसेज देता है। इससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन में होने वाली त्रुटि काफी कम हो जाती है।
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SWIFT Bank Explained - फोटो : Istock
स्विफ्ट सिस्टम की शुरुआत साल 1977 में हुई थी। इस बैंकिंग प्रणाली में 200 से भी अधिक देश जुड़े हुए हैं। स्विफ्ट का मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में है। आज दुनिया भर में 11 हजार से भी ज्यादा बैंक और संस्थान स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हुए हैं। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते इसे ग्लोबल ट्रांजैक्शन का व्हाट्सएप कहा जाता है। स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली ही ग्लोबल ट्रांजैक्शन को मैनेज करने का काम करती है।

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SWIFT Bank Explained - फोटो : Istock

स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली से रूस को बाहर निकालने पर क्या होगा असर?

अगर रूस को स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली से बाहर निकाला जाता है, तो रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो सकती है। स्विफ्ट बैंकिंग प्रणाली से बाहर निकाले जाने के बाद रूस का 798 बिलियन डॉलर का व्यापार सीधे तौर पर प्रभावित होगा। इसका सीधा असर रूस की जीडीपी के 46.8 फीसदी हिस्से पर देखने को मिलेगा। इसके अलावा रूस के बैंक 70 फीसदी विदेशी मुद्रा का लेन-देन स्विफ्ट के जरिए ही करते हैं। ऐसे में स्विफ्ट से रूस को बाहर निकाला जाना उसकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित करने का काम करेगा।
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SWIFT Bank Explained - फोटो : Istock
रूस के पास 630 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। ऐसे में अगर पश्चिमी देश रूस के ऊपर स्विफ्ट प्रतिबंध लगाते हैं, तो इससे रूस की विदेशा मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा फ्रीज हो जाएगा। ऐसे में रूस चाहकर भी इन पैसों का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इससे रूस की मुद्रा रूबल नकारात्मक ढंग से प्रभावित होगी।

रूस वैश्विक तेल का 10 प्रतिशत हिस्सा उत्पादन करता है। इसके अलावा वह ग्रेन और फर्टिलाइजर का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। स्विफ्ट प्रतिबंध लगने के बाद रूस को इनका व्यापार करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
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SWIFT Bank Explained - फोटो : Agency (File Photo)

भारत पर क्या होगा असर

अगर रूस को स्विफ्ट बैंक से पूरी तरह से बाहर निकाला जाता है, तो इससे उसे दूसरे देशों के साथ लेन देन करने में काफी दिक्कतें आएंगी। इसके अलावा विदेशी निवेश का फायदा भी रूस नहीं उठा पाएगा। यही नहीं रूस तेल और गैस का एक बड़ा निर्यातक देश है। स्विफ्ट प्रतिबंध लगने के बाद रूस को इनका व्यापार करने में काफी दिक्कत होगी, जिसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। इससे आने वाले समय में भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि देखने को मिलेगी।
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