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Personal Loan: पर्सनल लोन लेने वाले की मृत्यु के बाद बैंक किससे वसूलता है पैसा? जान लें क्या कहता है नियम

Sun, 19 Apr 2026 05:15 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Personal Loan Rules: अक्सर पर्सनल लोन लेने वाले लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि मृत्यु के बाद बैंक किससे पैसा वसूलता है। कुछ लोगों के मन ये डर रहता है कि अगर उन्हें कुछ हो गया तो बैंक उनके परिवार को परेशान कर सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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बैंक लोन - फोटो : Freepik
Personal Loan Recovery Process: अक्सर लोग अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं। पर्सनल लोग एक 'अनसिक्योर्ड लोन' होता है, इसका मतलब है कि बैंक लोग देते समय कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखता। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में ये सवाल आता है कि पर्सनल लोन लेने वाले की अगर मृत्यु हो जाती है तो उसके बाद बैंक किससे पैसा वसूलता है। सामान्यतौर पर ऐसी स्थिति में परिजनों के मन में यह डर बैठ जाता है कि क्या अब यह भारी कर्ज उनके बच्चों को चुकाना होगा या बैंक उनकी संपत्ति कुर्क कर लेगा?

बता दें कि बैंकिंग नियमों के अनुसार, पर्सनल लोन की जिम्मेदारी मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों पर सीधे तौर पर नहीं डाली जा सकती, लेकिन कुछ विशेष स्थितियां हैं जहां परिवार को बैंक के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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बैंक लोन - फोटो : Freepik
क्या कानूनी वारिस पैसे देने के लिए मजबूर हैं?
  • यह लोन सिर्फ उस आदमी के नाम पर होता है जिसने इसे लिया था। अगर उसकी मौत हो जाती है, तो कानूनी तौर पर यह कर्ज वहीं खत्म मान लिया जाता है।
  • बैंक वाले मृतक की पत्नी या बच्चों को पैसा भरने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। वे यह नहीं कह सकते कि "तुम्हारे पिता ने पैसा लिया था, तो अब तुम अपनी कमाई से इसे चुकाओ।"
  • हां, अगर मरने वाला आदमी अपने पीछे कोई जमीन, मकान या पैसा छोड़ गया है और वह उसके बच्चों को मिलता है, तो बैंक सिर्फ उस संपत्ति पर अपना हक जता सकता है।
  • लेकिन बैंक उतना ही पैसा ले सकता है जितनी उस संपत्ति की कीमत है, उससे एक रुपया भी ज्यादा नहीं।
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बैंक लॉकर का इंश्योरेंश - फोटो : Adobe Stock
को-एप्लीकेंट और गारंटर की भूमिका
  • अगर लोन में कोई सह-आवेदक (को-अप्लिकेंट) शामिल है, तो मुख्य कर्जदार की मृत्यु के बाद पूरी जिम्मेदारी उस दूसरे व्यक्ति की हो जाती है।
  • अगर किसी ने लोन के लिए गारंटी दी थी, तो बैंक बकाया राशि वसूलने के लिए उस गारंटर से संपर्क कर सकता है।
  • को-एप्लीकेंट होने का मतलब है कि आपने बैंक के साथ कर्ज चुकाने का साझा वादा किया है, जिसे अब आपको अकेले निभाना होगा।

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बैंक लॉकर का इंश्योरेंश - फोटो : Adobe Stock
लोन इंश्योरेंस कैसे बनता है सुरक्षा कवच?
  • ज्यादातर बैंक पर्सनल लोन देते समय इंश्योरेंस पॉलिसी भी बेचते हैं, जो ऐसे ही कठिन समय के लिए बनी होती है।
  • अगर लोन का बीमा हुआ है, तो मृत्यु के बाद इंश्योरेंस कंपनी बाकी बची हुई राशि का भुगतान बैंक को कर देती है।
  • सही बीमा होने पर परिवार पर कर्ज का कोई बोझ नहीं आता और बैंक अपना केस बंद कर देता है।
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बैंक - फोटो : Adobe Stock
बैंक की अंतिम कार्यवाही क्या होती है?
  • अगर न तो कोई बीमा है और न ही कोई को-एप्लीकेंट, तो बैंक अंततः इस कर्ज को 'बैड डेट' मानकर बट्टे खाते में डाल देता है।
  • बैंक अक्सर मृतक के परिवार से सहानुभूति के आधार पर बात करते हैं और कभी-कभी सेटलमेंट का विकल्प भी देते हैं।
  • बैंक अपनी कागजी कार्यवाही पूरी करने के लिए नोटिस भेज सकता है, लेकिन वह जबरन वसूली की शक्ति नहीं रखता।
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