आज के समय अंगदान को लेकर हमारे समाज में काफी जागरूकता है। पर बहुत से लोग अंग दान की प्रक्रिया नहीं मालूम है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं, साथ ही ये भी जानेंगे कि अंगदान को लेकर हमारे समाज किस तरह के अफवाहें हैं।
अंगदान को 'महादान' कहा जाता है क्योंकि एक व्यक्ति मृत्यु के बाद अंगदान करके लगभग 8 लोगों को नया जीवन दे सकता है। भारत में अंगदान की कमी के कारण हर साल लाखों लोग समय पर इलाज न मिलने से दम तोड़ देते हैं। इस कमी को दूर करने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भारत सरकार ने 'नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन' के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी है।
अब कोई भी नागरिक घर बैठे आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अंगदान का संकल्प ले सकता है। आज के नए डिजिटल नियमों के तहत आपके अंगदान के संकल्प को अब आपके 'आभा' कार्ड यानी डिजिटल हेल्थ आईडी से भी जोड़ा जा रहा है।
इससे आपातकालीन स्थिति में डॉक्टरों को आपकी इच्छा के बारे में तुरंत जानकारी मिल सकेगी। अंगदान केवल एक पुण्य का कार्य नहीं है, बल्कि यह मानवता के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी भी है जिसे निभाने के लिए अब लंबी कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं है। आइए इसकी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
सबसे पहले भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल https://notto.mohfw.gov.in/ पर जाएं।
यहां 'DONOR PLEDGE FORM' के विकल्प पर क्लिक करें और एक ऑनलाइन फॉर्म भरें, जिसमें आपको अपनी बेसिक जानकारी और उन अंगों का चुनाव करना होगा जिन्हें आप दान करना चाहते हैं।
आधार ओटीपी के जरिए वेरिफिकेशन पूरा होते ही आपका 'डोनर कार्ड' जनरेट हो जाएगा, जिसे आप भविष्य के लिए डाउनलोड या प्रिंट कर सकते हैं।
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ऑर्गन डोनेट करना
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किन अंगों और ऊतकों का किया जा सकता है दान?
अंगदान दो प्रकार का होता है: जीवित दान और मृत्यु उपरांत दान। हम इस लेख में मृत्यु उपरांत अंगदान की बात कर रहे हैं।
मृत्यु के बाद हृदय, फेफड़े, लिवर, किडनी, अग्न्याशय और आंतों जैसे महत्वपूर्ण अंगों का दान किया जा सकता है।
इसके अलावा ऊतकों जैसे कॉर्निया (आंखें), त्वचा, हड्डियां और हृदय के वाल्व का भी दान संभव है। दान किए गए अंगों को विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' के जरिए जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया जाता है ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
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ऑर्गन डोनेट करना
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अंगदान से जुड़े भ्रम और वास्तविकता
समाज में यह भ्रम है कि अंगदान से शरीर विकृत हो जाता है, जबकि हकीकत में डॉक्टर अंगों को बहुत सम्मान और शल्य चिकित्सा के साथ निकालते हैं।
अंगदान के लिए उम्र की कोई सख्त सीमा नहीं है, एक स्वस्थ व्यक्ति चाहे वह किसी भी उम्र का हो, अंगदान का संकल्प ले सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंगदान का संकल्प लेने के बाद अपने परिवार को इसके बारे में जरूर बताएं, क्योंकि आपकी मृत्यु के बाद उनकी सहमति अनिवार्य होती है।
अंगदान केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार को नई उम्मीद देता है।
आज के समय में तकनीकी प्रगति और सरकारी सहयोग ने इस प्रक्रिया को इतना सुरक्षित बना दिया है कि अब इसमें किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या देरी की गुंजाइश नहीं है।
आपका एक छोटा सा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किसी के अंधेरे जीवन में रोशनी ला सकता है या किसी को मौत के मुंह से बाहर निकाल सकता है।