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एनपीएस या पीपीएफ: बुढ़ापे के लिए कौन सी स्कीम है ज्यादा बेहतर? यहां समझें दोनों के बीच का बारीक अंतर

Sun, 30 Aug 2026 09:01 AM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

National Pension System Benefits: जब भी रिटायरमेंट में बचत की बात आती है तो आमतौर पर लोगों के दिमाग में सबसे पहले पीपीएफ और एनपीएस ही आता है। मगर अक्सर लोगों के मन में इन दोनों फायदे और नुकसान को लेकर कई सवाल होते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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एनपीएस बनाम पीपीएफ - फोटो : AI
बुढ़ापे को सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सही समय पर निवेश करना बहुत जरूरी होता है। जब भी रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो भारत में नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) का नाम सबसे पहले आता है। अक्सर लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि इन दोनों में से उनके लिए कौन सी स्कीम ज्यादा फायदेमंद साबित होगी। 

पीपीएफ जहां सुरक्षा की पूरी गारंटी देता है, वहीं एनपीएस बाजार के आधार पर बेहतर रिटर्न का मौका देता है। आइए, इन दोनों बेहतरीन निवेश विकल्पों के बीच के मुख्य अंतर को काफी सरल भाषा में समझते हैं ताकि आप अपने लिए सही फैसला ले सकें।
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एनपीएस क्या है और इसके मुख्य फायदे - फोटो : एडोव
एनपीएस क्या है और इसके मुख्य फायदे
  • एनपीएस मुख्य रूप से एक मार्केट-लिंक्ड रिटायरमेंट योजना है, जिसमें आपका पैसा इक्विटी और डेट यानी शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड में निवेश किया जाता है।
  • इसमें आपको अपनी पसंद के हिसाब से निवेश का विकल्प चुनने की आजादी मिलती है।
  • चूंकि यह बाजार से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें लंबे समय में अन्य पारंपरिक योजनाओं के मुकाबले काफी तगड़ा रिटर्न मिलने की पूरी उम्मीद रहती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
पीपीएफ की विशेषताएं और सुरक्षा
  • पीपीएफ सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक बेहद सुरक्षित और भरोसेमंद बचत योजना है, जिसमें निवेश करने पर आपके पैसे डूबने का कोई खतरा नहीं रहता। 
  • इसमें मिलने वाला ब्याज सरकार द्वारा तय होता है और इस पर टैक्स छूट भी मिलती है। 
  • यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो बिना किसी बाजार जोखिम के अपने पैसे सुरक्षित रखकर निश्चित रिटर्न पाना चाहते हैं। 
  • पीपीएफ की सबसे अच्छी बात यह है कि आप अपनी इच्छानुसार इसमें पैसे जमा कर सकते हैं। 
  • इसके नियम काफी लचीले हैं, जैसे इसमें एक वित्त वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। 
  • ऐसे में जब आपके पास पैसे हों तो इसमें ज्यादा निवेश करें, और पैसे न होने पर सिर्फ 500 रुपये सालाना जमा करके भी अकाउंट को एक्टिव रख सकते हैं।

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दोनों योजनाओं में लॉक-इन पीरियड और निकासी के नियम - फोटो : AdobeStock
दोनों योजनाओं में लॉक-इन पीरियड और निकासी के नियम
  • पीपीएफ खाता पूरे 15 साल में मेच्योर होता है, हालांकि बीच में कुछ नियमों के तहत पैसे निकाले जा सकते हैं। 
  • दूसरी ओर, एनपीएस सीधे आपके रिटायरमेंट यानी 60 साल की उम्र तक चलता है, और रिटायरमेंट के बाद इसमें से एक तय हिस्सा पेंशन के रूप में हर महीने मिलता है, जिससे बुढ़ापे में पैसों की तंगी नहीं होती है।
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आपके लिए कौन सी स्कीम रहेगी ज्यादा बेहतर? - फोटो : AdobeStock
आपके लिए कौन सी स्कीम रहेगी ज्यादा बेहतर?
  • अगर आप थोड़ा जोखिम उठाकर ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं और बुढ़ापे में हर महीने रेगुलर पेंशन चाहते हैं, तो एनपीएस आपके लिए एक शानदार विकल्प है।
  • वहीं, अगर आप बिना किसी रिस्क के पूरी सुरक्षा और गारंटीड रिटर्न के साथ पैसा जोड़ना चाहते हैं, तो पीपीएफ आपके निवेश के लिए सबसे सही और सुरक्षित जरिया साबित होगा।
  • इस बात का ध्यान रखिए कि आमतौर पर पीपीएफ में 7 % तक का ब्याज मिलता है वहीं एनपीएस में लगभग 10-11 % सामान्य रुप से मिल जाता है।
  • ये समझना जरूरी है कि एनपीएस बाजार के उतार चढ़ाव पर निर्भर करता है इसका फायदा कम अधिक भी हो सकता है।
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