Post Loan Settlement: आर्थिक तंगी के कारण जब कोई व्यक्ति अपने लोन की ईएमआई भरने में असमर्थ होता है, तो बैंक उसे 'लोन सेटलमेंट' का विकल्प देते हैं। इसमें बैंक अपने नुकसान को कम करने के लिए ग्राहक को मूलधन से कम राशि चुकाकर खाता बंद करने की अनुमति दे देता है। हालांकि, आम इंसान को यह राहत की बात लग सकती है, लेकिन बैंकिंग की भाषा में इसे 'डिफॉल्ट' के करीब माना जाता है।
सेटलमेंट करने के बाद आपका सिबिल स्कोर तेजी से गिरता है और क्रेडिट रिपोर्ट में 'सेटेल्ड' लिखा आता है। इसका सीधा असर आपके भविष्य में लोन लेने की क्षमता पर पड़ता है। बैंक इसे एक नकारात्मक संकेत मानते हैं, जिससे नया कर्ज मिलना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।