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Job Rights: क्या वीक ऑफ के दिन बॉस का फोन उठाना है जरूरी? जानें क्या हैं नियम

Sun, 12 Apr 2026 05:35 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Right To Disconnect India : अक्सर दफ्तर में काम करने वाले लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि क्या छुट्टी वाले दिन बॉस का सहकर्मी का फोन उठाना जरूरी है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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वीक ऑफ के दिन ऑफिस का फोन उठाना चाहिए या नहीं? - फोटो : Adobe Stock
Labor Laws For Weekly Off: हमारे देश की एक बड़ी आबादी अपनी जीविका के लिए दफ्तरों में नौकरी करती है। ऐसे में अक्सर यह देखने को मिलता है कि कुछ मैनेजर्स या बॉस अपने कर्मचारियों को छुट्टी (वीक ऑफ) के दिन भी काम थमा देते हैं या वीडियो मीटिंग अटेंड करने का दबाव डालते हैं। इस वजह से काम और निजी जीवन के बीच की सीमा काफी धुंधली हो गई है और कर्मचारी छुट्टी के दिन भी मानसिक शांति का अनुभव नहीं कर पाता।

ऐसे में कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या छुट्टी के दिन ऑफिस का फोन उठाना उनकी कानूनी जिम्मेदारी है या वे इसे नजरअंदाज कर सकते हैं? आधुनिक वर्क कल्चर और 'राइट टू डिस्कनेक्ट' की बढ़ती चर्चा के बीच, यह समझना बेहद जरूरी है कि आराम का समय आपका मौलिक अधिकार है।

भारत के श्रम कानूनों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, छुट्टी का अर्थ मानसिक और शारीरिक विश्राम है। अगर आपके अपॉइंटमेंट लेटर में आपातकालीन ड्यूटी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, तो अवकाश के दिन काम के लिए बार-बार दबाव डालना 'मानसिक प्रताड़ना' की श्रेणी में आ सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस मामले में कानून क्या कहता है।
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क्या कहता है कानून? - फोटो : अमर उजाला
क्या कहता है भारत का श्रम कानून?
  • छुट्टी के दिन काम को लेकर भारतीय कानून कर्मचारियों को कुछ सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  • फैक्ट्री एक्ट और शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत काम के घंटे तय होने चाहिए और साप्ताहिक छुट्टी भी जरूर मिलनी चाहिए।
  • अगर कंपनी आपको छुट्टी पर बुलाती है, तो इसके लिए कर्मचारी की सहमति और बदले में 'कॉम्पेंसेटरी ऑफ' मिलना चाहिए।
  • श्रम नियमों के अनुसार, लगातार काम का दबाव कर्मचारी के स्वास्थ्य के खिलाफ है और इसके लिए शिकायत की जा सकती है।
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छुट्टी के ऑफिस का फोन उठाना चाहिए या नहीं? - फोटो : freepik
'राइट टू डिस्कनेक्ट' और नई पॉलिसी
  • दुनियाभर में अब ऑफिस के समय के बाद काम से दूरी बनाने के अधिकार पर जोर दिया जा रहा है।
  • कई देशों में कानून है कि ड्यूटी खत्म होने के बाद कर्मचारी को ऑफिस के ईमेल्स या फोन का जवाब देने की जरूरत नहीं है।
  • भारत में भी कई आधुनिक कंपनियां अब 'नो कॉल ऑन वीकेंड' पॉलिसी को बढ़ावा दे रही हैं।
  • यह नियम आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और 'बर्नआउट' से बचाने के लिए बनाया गया है।

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छुट्टी के ऑफिस का फोन उठाना चाहिए या नहीं? - फोटो : Adobe Stock
अगर बॉस बार-बार फोन करे तो क्या करें?
  • ऐसी स्थिति को शांति और चतुराई से संभालने के कुछ तरीके आप अपना सकते हैं।
  • अपने मैनेजर से काम के घंटों और वीक ऑफ के बारे में विनम्रता से बात करें।
  • पूछें कि क्या कोई काम वास्तव में आपातकालीन है या उसे सोमवार तक टाला जा सकता है।
  • अपने 'ऑफर लेटर' या कंपनी की 'HR हैंडबुक' को दोबारा पढ़ें कि वहां छुट्टी पर उपलब्धता को लेकर क्या लिखा है।
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छुट्टी के ऑफिस का फोन उठाना चाहिए या नहीं? - फोटो : Adobe Stock
काम और जीवन में संतुलन
  • ध्यान रखें कि नौकरी आपके जीवन का हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं, इसलिए अपनी सीमाओं को पहचानें।
  • पर्याप्त आराम न मिलने से आपकी कार्यक्षमता घट सकती है और तनाव बढ़ सकता है।
  • वीक ऑफ के दिन अपने ऑफिस के ग्रुप्स को म्यूट करना और काम से दूरी बनाना मानसिक शांति के लिए जरूरी है।
  • अगर कोई कंपनी नियमों का बार-बार उल्लंघन करती है, तो आप कानूनी सलाह या एचआर की मदद ले सकते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सामान्य जानकारी और वर्क-लाइफ बैलेंस की जागरूकता के लिए है। विशिष्ट कानूनी सलाह के लिए अपने वकील या श्रम विभाग से संपर्क करें।
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