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पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस: क्या आपकी कंपनी का हेल्थ कवर इलाज के लिए काफी है? जानें अलग से पर्सनल पॉलिसी के फायदे

Wed, 26 Aug 2026 06:18 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Personal Health Insurance Benefits: बहुत से लोग जो ऑफिस में काम करते हैं तो उनके पास कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस रहता है, इसलिए वो पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस लेने के बारे में नहीं सोचते हैं। मगर पर्सनल पॉलिसी लेने के अपने कई फायदे हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस - फोटो : AI
Corporate Health Insurance Limits: आजकल ज्यादातर कॉर्पोरेट कंपनियों में कर्मचारियों को ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा दिया जाता है, जिससे कई लोग यह मान बैठते हैं कि अब उन्हें अलग से कोई मेडिकल बीमा लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन क्या यह कॉर्पोरेट कवर किसी गंभीर बीमारी या बड़े अस्पताल के बिल के समय वाकई काफी होता है?

सच तो यह है कि कंपनी का हेल्थ कवर सीमित सुविधाओं के साथ आता है और यह आपकी नौकरी से बंधा होता है। इसलिए परिवार को पूरी तरह से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए एक अलग पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस होना बेहद जरूरी है।
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कंपनी का हेल्थ कवर और उसकी सीमाएं - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
कंपनी का हेल्थ कवर और उसकी सीमाएं
  • कंपनियों का ग्रुप कवर आमतौर पर 3 लाख से 5 लाख रुपये तक का ही होता है, जो कई बार गंभीर बीमारी या आईसीयू के खर्च के सामने बहुत छोटा पड़ जाता है।
  • यह कवर केवल तभी तक मान्य रहता है जब तक आप उस कंपनी में कार्यरत हैं; नौकरी छूटते ही, ले-ऑफ होने पर या कंपनी बदलते ही कवर तुरंत समाप्त हो जाता है।
  • कंपनी कभी भी लागत घटाने के लिए बीमा कवर की राशि कम कर सकती है या पॉलिसी की शर्तें बदल सकती है।
  • कई कंपनियां अब माता-पिता या आश्रितों को कवर करने के लिए अतिरिक्त प्रीमियम मांगती हैं या उन्हें कवर से बाहर कर देती हैं।
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पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस लेने के सबसे बड़े फायदे - फोटो : Adobe stock
पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस लेने के सबसे बड़े फायदे
  • आप चाहे नौकरी बदलें, बेरोजगार हों या रिटायर हो जाएं, अगर आप समय से प्रीमियम भरते हैं तो आपकी पर्सनल पॉलिसी हमेशा चालू रहती है और आपको जीवनभर सुरक्षा देती है।
  • आप अपनी और अपने परिवार की मेडिकल जरूरतों के अनुसार 10 लाख, 20 लाख या उससे अधिक का पर्याप्त सम इंश्योर्ड चुन सकते हैं।
  • अगर आप किसी साल कोई क्लेम नहीं लेते हैं, तो आपकी पर्सनल पॉलिसी का कवर बिना अतिरिक्त प्रीमियम के 20% से 50% तक बढ़ जाता है।
  • आप अपनी पर्सनल पॉलिसी में क्रिटिकल इलनेस, एक्सीडेंटल डेथ या मैटरनिटी जैसे उपयोगी राइडर्स अलग से जोड़ सकते हैं।

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कम उम्र में पर्सनल पॉलिसी खरीदने का गणित - फोटो : ANI
कम उम्र में पर्सनल पॉलिसी खरीदने का गणित
  • युवावस्था और स्वस्थ शरीर के दौरान पर्सनल हेल्थ पॉलिसी का सलाना प्रीमियम काफी कम और किफायती होता है।
  • ज्यादातर बीमारियों का 2 से 4 साल का वेटिंग पीरियड होता है, जो आपकी कम उम्र में ही आसानी से पूरा हो जाता है।
  • बड़ी उम्र या बीमार होने के बाद नई पर्सनल पॉलिसी मिलना मुश्किल हो जाता है या प्रीमियम बहुत ज्यादा हो जाता है।
  • रिटायरमेंट के बाद जब सबसे ज्यादा मेडिकल खर्च की जरूरत होती है, तब आपकी पर्सनल पॉलिसी ही काम आती है।
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टैक्स लाभ और सुरक्षा का दोहरा कवच - फोटो : Adobe Stock
टैक्स लाभ और सुरक्षा का दोहरा कवच
  • पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस के लिए चुकाए गए प्रीमियम पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 80D के तहत 25,000 रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है।
  • छोटे-मोटे अस्पताल के इलाज के लिए आप अपनी कंपनी के कवर का इस्तेमाल कर सकते हैं और बड़ा बिल आने पर अपनी पर्सनल पॉलिसी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अगर पर्सनल पॉलिसी महंगी लगे, तो आप कंपनी के कवर के ऊपर एक सस्ता 'सुपर टॉप-अप' प्लान लेकर भी अपना कुल कवर बढ़ा सकते हैं।
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