Property Division Without Will: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अगर उसने कोई वसीयत नहीं छोड़ी है, तो उसकी संपत्ति का बंटवारा 'उत्तराधिकार कानूनों' के तहत होता है। भारत में धर्म के आधार पर उत्तराधिकार के नियम अलग-अलग हैं। हिंदुओं, सिखों, जैनियों और बौद्धों के लिए 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956' लागू होता है, जबकि मुसलमानों के लिए उनके 'पर्सनल लॉ' के नियम प्रभावी होते हैं। आज के कानूनी परिदृश्य में, संपत्ति विवादों से बचने के लिए इन नियमों को समझना अत्यंत आवश्यक है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि बहुत से लोगों को ये मालूम भी नहीं होता है कि हिंदू और मुस्लिम में संपत्ती को लेकर अलग-अलग कानून हैं। जहां हिंदू कानून में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार दिए गए हैं, वहीं मुस्लिम कानून में विरासत का हिस्सा तय करने के लिए गणितीय फॉर्मूले और जेंडर आधारित अलग-अलग प्रावधान हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि वसीयत न होने की स्थिति में कानूनी वारिसों का क्रम और उनका हिस्सा कैसे निर्धारित किया जाता है।