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Indian Railways: ट्रेन में कितने टन का एसी लगा होता है? बहुत कम लोगों को पता है इसका जवाब

Wed, 23 Apr 2025 09:39 AM IST
शिखर बरनवाल यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गर्मी के दिनों अक्सर लोग ट्रेन के एसी कोच में यात्रा करना चाहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ट्रेन के एसी बोगी में कितने टन का एसी लगा होता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Indian Railways - फोटो : Adobe Stock
भारतीय रेलवे हमारे देश में लंबी दूरी की यात्रा का सबसे किफायती और आरामदायक साधन है। गर्मियों के सीजन या उमस भरी परिस्थितियों में, ट्रेन के एसी कोच में यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव मिलता है। ट्रेन के एसी कोच में मिलने वाली ठंडक के चलते यात्रियों को सफर के समय ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं क्या आपको इस बारे में पता है कि ट्रेन के एक पूरे डिब्बे को ठंडा रखने के लिए लगाया गया एयर कंडीशनर (एसी) कितने टन का होता है? यह एक ऐसा सवाल है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। अगर आप इस बारे में नहीं जानते हैं, तो यह खबर खास आपके लिए है। आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं।
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Indian Railways - फोटो : AdobeStock
एसी की क्षमता को 'टन' में मापने का क्या अर्थ है?
एसी की क्षमता को मापने के लिए जिस इकाई 'टन' का उपयोग किया जाता है, वह वजन का मापक नहीं है, बल्कि यह उसकी कूलिंग कैपेसिटी यानी ठंडक पैदा करने की क्षमता को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से, एक टन कूलिंग का मतलब था कि कोई सिस्टम 24 घंटे में एक टन (लगभग 1000 किलोग्राम) बर्फ को पिघलाने जितनी गर्मी को हटा सकता है। आधुनिक संदर्भ में, 1 टन एसी लगभग 12,000 ब्रिटिश थर्मल यूनिट (BTU) प्रति घंटे की दर से गर्मी को कमरे से बाहर कर सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, एसी का टन जितना ज्यादा होगा, उसकी ठंडा करने की क्षमता उतनी ही अधिक होगी।
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Indian Railways - फोटो : Adobe Stock
ट्रेन के एसी कोच में कितने टन का एसी लगा होता है?
अब आइए मुख्य सवाल का जवाब जानते हैं। ट्रेन के एक एसी डिब्बे को ठंडा रखने के लिए सामान्य घरों में लगे एसी से कहीं अधिक क्षमता वाले यूनिट की आवश्यकता होती है। भारतीय रेलवे के एक एसी कोच में आमतौर पर लगे एयर कंडीशनर की क्षमता लगभग 7 से 8 टन तक होती है।

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Indian Railways - फोटो : AdobeStock
एसी की क्षमता यात्रियों की संख्या पर कैसे निर्भर करती है?
हालांकि, एसी की यह क्षमता मुख्य रूप से डिब्बे में यात्रियों की संख्या और उस कोच के प्रकार पर निर्भर करती है। क्योंकि यात्रियों की संख्या सीधे तौर पर डिब्बे के कूलिंग लोड को प्रभावित करती है।
  • एसी फर्स्ट क्लास : इसमें सबसे कम यात्री होते हैं। इसलिए इसमें 6.7 टन का एसी होती है।
  • एसी 2-टीयर : इसमें फर्स्ट क्लास से थोड़े अधिक यात्री होते हैं। इसमें 5 टन के दो एसी होते हैं।
  • एसी 3-टीयर : इसमें सबसे ज्यादा यात्री होते हैं। इसमें 7 टन के दो एसी होते हैं।
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Indian Railways - फोटो : AdobeStock
चूंकि एसी 3-टीयर में यात्रियों की संख्या एसी फर्स्ट क्लास या 2-टीयर की तुलना में काफी अधिक होती है, इसलिए उन्हें प्रभावी ढंग से ठंडा रखने के लिए थोड़ी अधिक कूलिंग क्षमता की आवश्यकता हो सकती है। यही कारण है कि कोच के प्रकार और उसमें बैठने वाले यात्रियों की अधिकतम संख्या के अनुसार एसी की क्षमता भिन्न हो सकती है, ताकि सभी यात्रियों को पर्याप्त ठंडक मिल सके।
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