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ध्यान दें: क्या है नया नियम जिससे पता चल पाएगा प्रोडक्ट शाकाहारी है या नहीं? आसान भाषा में यहां जानें सबकुछ

Wed, 23 Sep 2026 12:09 PM IST
प्रकाश चंद जोशी यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और अन्य कॉस्मेटिक्स खरीदते समय पैकेट पर लगे रंगीन डॉट से यह पहचानना आसान होगा कि प्रोडक्ट शाकाहारी है या मांसाहारी मूल का। दरअसल, 21 सितंबर 2026 से लागू संशोधन में हरे डॉट को शाकाहारी और लाल या भूरे डॉट को मांसाहारी मूल के उत्पाद के लिए निर्धारित किया गया है।
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टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर लाल-हरा निशान लगाना जरूरी क्यों है? - फोटो : Amar Ujala AI
बाजार से साबुन, शैंपू या टूथपेस्ट खरीदते समय अक्सर ग्राहक सिर्फ उसकी कीमत, ब्रांड और इस्तेमाल की जानकारी देखते हैं, लेकिन प्रोडक्ट में इस्तेमाल कुछ सामग्री पौधों से आई है या पशु स्रोत से, यह केवल नाम पढ़कर समझना हमेशा आसान नहीं होता।

इसी को ध्यान में रखते हुए पैकेजिंग से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट करने के लिए सरकार ने Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011 में बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत संबंधित उत्पादों के पैकेट पर हरा या लाल/भूरा डॉट लगाया जाएगा। चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। आप आगे इस बारे में जान सकते हैं...
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टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर लाल-हरा निशान लगाना जरूरी क्यों है? - फोटो : AI Generated
अब पैकेट देखकर कैसे पहचान पाएंगे?
  • केंद्र सरकार की 21 सितंबर 2026 की अधिसूचना के मुताबिक साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, अन्य कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज के पैकेट पर प्रोडक्ट की प्रकृति बताने वाला निशान देना अनिवार्य होगा
  • शाकाहारी मूल के उत्पाद के लिए हरे रंग का डॉट होगा
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टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर लाल-हरा निशान लगाना जरूरी क्यों है? - फोटो : AI Generated
  • वहीं, मांसाहारी मूल के उत्पाद के लिए लाल या भूरे रंग का डॉट लगाया जाएगा
  • यह निशान पैकेट के Principal Display Panel के ऊपरी हिस्से में होना चाहिए
  • यह संशोधन 21 सितंबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ प्रभावी हो गया।

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टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर लाल-हरा निशान लगाना जरूरी क्यों है? - फोटो : Adobe stock
सिर्फ चीजों का नाम पढ़ना क्यों काफी नहीं?
  • किसी कॉस्मेटिक या टॉयलेटरी प्रोडक्ट की सामग्री देखकर हमेशा यह पता लगाना आसान नहीं होता कि उसका स्रोत क्या है
  • उदाहरण के लिए ग्लिसरीन, स्टीयरिक एसिड और कुछ फैटी एसिड पौधों से भी बनाए जा सकते हैं और पशु वसा से भी
  • इसी तरह लैनोलिन ऊन से प्राप्त होता है, जबकि कोलेजन और जिलेटिन पशु स्रोतों से जुड़े होते हैं
  • ऐसे में पैकेट पर दिया गया रंगीन डॉट ग्राहक को प्रोडक्ट की मूल प्रकृति समझने में मदद करेगा
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टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर लाल-हरा निशान लगाना जरूरी क्यों है? - फोटो : Adobe Stock
छोटे पैक के लिए भी उपयोगी जानकारी
  • कई छोटे पैकेटों पर सामग्री की पूरी जानकारी सीमित जगह के कारण आसानी से उपलब्ध नहीं होती
  • ऐसे में पैकेजिंग पर लगा यह निशान ग्राहक के लिए एक नजर में जानकारी पाने का आसान तरीका बन सकता है
  • हालांकि, किसी उत्पाद की पूरी जानकारी के लिए पैकेट पर दी गई अन्य अनिवार्य घोषणाओं को भी देखना जरूरी है
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टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर लाल-हरा निशान लगाना जरूरी क्यों है? - फोटो : Adobe Stock
प्रोडक्ट के पैकेट पर गलत रंग का डॉट दिखे तो क्या करें?
  • अगर किसी पैकेट पर दी गई जानकारी और उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को लेकर संदेह हो, तो ग्राहक को पैकेट संभालकर रखना चाहिए
  • उत्पाद का नाम, निर्माता की जानकारी, बैच नंबर और अन्य पैकेजिंग विवरण शिकायत के समय काम आ सकते हैं
  • आप इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर 1915 या 1800114000 पर दर्ज करवा सकते हैं
  • आप आधिकारिक वेबसाइट https://consumerhelpline.gov.in/public/ पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं
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टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर लाल-हरा निशान लगाना जरूरी क्यों है? - फोटो : Freepik
कितनी सजा हो सकती है?
  • लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत जुर्माने और सजा का भी प्रावधान है
  • जैसे- पहली बार उल्लंघन करने पर कंपनी या जिम्मेदार व्यक्ति पर 25000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है
  • दूसरी बार नियम तोड़ने पर ये जुर्माना 50000 रुपये का हो जाएगा
  • तीसरी बार या उसके बाद भी उल्लंघन करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना या 1 साल की जेल या दोनों हो सकते हैं
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