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Watermelon Cultivation: तरबूज की खेती में मिलता है लाखों का मुनाफा, जानिए कैसे इसकी खेती करके आप बन सकते हैं लखपति

Wed, 16 Feb 2022 03:22 PM IST
ज्योति मेहरा यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Watermelon Farming तरबूज की खेती में मिलता हे लोखों का मुनाफा - फोटो : istock
भारत एक कृषि प्रधान देश है। आज भी देश में 68 प्रतिशत जनसंख्या कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर है। बीते कुछ सालों में किसान कई हद तक जागरूक भी हुए हैं। अब धान और गेहूं के अलावा अन्य फसलों पर भी किसान ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें कम समय में अधिक मुनाफा पाया जा सकता है। इसी क्रम में आज कल तरबूज की खेती का चलन बढ़ रहा है। इसमें खास बात ये है कि तरबूज की खेती में अन्य फलों के फसलों की तुलना में कम खाद, कम समय, और कम पानी की आवश्यकता होती है। मुख्य रूप से इसकी खेती उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में होती है। अगर आप भी इसकी खेती करने के बारे में सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है। आज हम आपको तरबूज की खेती के बारे में कुछ जरूरी बातें बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप भी तरबूज की फसल से लाखों रुपये कमा सकते हैं।
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Watermelon Farming तरबूज की खेती में मिलता हे लोखों का मुनाफा - फोटो : istock
उपयुक्त जलवायु और मिट्टी की जानकारी
  • तरबूज की खेती के करने के लिए सबसे उपयुक्त गर्म और औसत आर्द्रता वाले क्षेत्र होते हैं। इसके सही विकास के लिए लगभग 25 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। विशेषज्ञ का कहना है कि इसकी खेती के लिए रेतीली और रेतीली दोमट भूमि सबसे अच्छी मानी जाती है, जो गंगा, यमुना और नदियों के खाली स्थानों में क्यारियां बनाकर बेहतर तरीके से की जा सकती है।
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Watermelon Farming तरबूज की खेती में मिलता हे लोखों का मुनाफा - फोटो : istock
  • अगर तरबूज की खेती सही तकनीक से की जाए तो लाखों का मुनाफा कमाया जा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से की जाए। साथ ही खेत में पानी की मात्रा कम या ज्यादा नहीं होनी चाहिए। आपको नदियों के खाली स्थानों में क्यारियां बना लेनी चाहिए। इसके बाद भूमि में गोबर की खाद को अच्छी तरह मिलाएं। ध्यान रहे यदि रेत की मात्रा अधिक है, तो ऊपरी सतह को हटा दें और नीचे की मिट्टी में खाद को मिलाएं। इससे आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे।

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Watermelon Farming तरबूज की खेती में मिलता हे लोखों का मुनाफा - फोटो : istock
बुवाई का सही समय 
  • किसी भी फसल की खेती समय के हिसाब से की जाती है, जो स्थान के हिसाब से अलग-अलग भी हो सकता है। तरबूज की बुवाई उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में फरवरी के महीने में की जाती है। साथ ही नवम्बर से मार्च तक का समय नदियों के किनारों पर तरबूज की बुवाई के लिए सही होता है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में बुवाई मार्च से अप्रैल में की जाती है।
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Watermelon Farming तरबूज की खेती में मिलता हे लोखों का मुनाफा - फोटो : istock
क्या है बुवाई की विधि 
  • तरबूज की बुवाई में किस्म और भूमि उर्वरा शक्ति पर निर्भर करती है। मेड़ों पर लगभग 2.5 से 3.0 मीटर की दूरी पर 40 से 50 सेंटीमीटर चौड़ी नाली बनाकर इसकी बुवाई की जाती है। इसके बाद नालियों के दोनों किनारों पर करीब 60 सेंटीमीटर की दूरी पर 2 से 3 बीज बो दें। इसके बाद नदियों के किनारे पर गड्डे बनाकर उसमें मिट्टी, गोबर की खाद और बालू का मिश्रण थालें में भरी जाती है फिर थालें में दो बीज लगा दें। इसके बाद अंकुरण के लगभग 10-15 दिन बाद एक जगह पर 1 से 2 स्वस्थ पौधों को छोड़कर बाकि के पौधे निकाल दें।
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