सरकार का ईपीएफओ बड़ा फैसला
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इसको एक उदाहरण से समझते हैं- जैसे मान लीजिए रमेश, उमेश और पूजा एक ही कंपनी में काम करते हैं। अब मान लीजिए रमेश की बेसिक सैलरी + डीए जोड़कर 14,000 रुपये, वहीं उमेश की बेसिक सैलरी + डीए जोड़कर 24,000 रुपये और पूजा की 26,000 रुपये क्रमशः आ रहा है।
1. रमेश (बेसिक सैलरी + डीए: 14,000 रुपये)
रमेश पर इस नए नियम के लागू होने से प्रक्रियात्मक रूप से कोई बदलाव नहीं आएगा। चूंकि उनका वेतन 15,000 रुपये की पुरानी सीमा से ही कम है, इसलिए उनका पीएफ पहले की तरह अनिवार्य रूप से कटता रहेगा। नए नियम का उनकी टेक-होम सैलरी या पीएफ कटौती पर कोई नया प्रभाव नहीं पड़ेगा और उन्हें पहले की तरह ही पीएफ और कंपनी के बराबर योगदान का लाभ मिलता रहेगा।
2. उमेश (बेसिक सैलरी + डीए: 24,000 रुपये)
इस नए फैसले का सबसे बड़ा और सीधा फायदा उमेश को मिलेगा। पहले सैलरी 15,000 रुपये से अधिक होने और पीएफ न कटने की वजह से उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा था। लेकिन अब नियम में बदलाव होने के बाद 25,000 रुपये की नई लिमिट में आने के कारण उमेश का पीएफ काटना कंपनी के लिए अनिवार्य हो जाएगा।
इससे उमेश की हर महीने इन-हैंड (हाथ में आने वाली) सैलरी थोड़ी कम जरूर होगी, लेकिन उनकी कंपनी को भी उनके पीएफ खाते में अपनी तरफ से बराबर का योगदान देना पड़ेगा। नतीजा यह होगा कि उमेश के नाम पर हर महीने एक बड़ी बचत जमा होने लगेगी, जो उनके भविष्य और बुढ़ापे को सुरक्षित बनाएगी।
3. पूजा (बेसिक सैलरी + डीए: 26,000 रुपये)
पूजा की बेसिक सैलरी और डीए मिलाकर 26,000 रुपये है, जो सरकार की 25,000 रुपये की नई सीमा से अधिक है। इसलिए पूजा के लिए पीएफ कटना कानूनन अनिवार्य नहीं होगा। इस नए नियम के बाद भी उनकी टेक-होम सैलरी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, यदि पूजा और उनकी कंपनी आपस में सहमति जताते हैं, तो पूजा अपनी इच्छा से (Voluntary PF के तहत) पीएफ कटवाने का विकल्प चुन सकती हैं, लेकिन सरकार के इस नए अनिवार्य नियम का उन पर सीधा असर नहीं पड़ेगा
किसको इस बदलाव का फायदा नहीं मिलेगा?
- जैसा कि हमने पूजा के बारे में बताया कि उनकी बेसिक सैलरी + डीए मिलाकर 26000 है जो कि 25,000 रुपये से अधिक है, पूजा पर इस नए नियम का कोई असर नहीं पड़ेगा।
- हालांकि, अगर उनकी कंपनी और वे खुद चाहें तो आपसी सहमति से स्वैच्छिक आधार पर अपना पीएफ कटवा सकते हैं।