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क्या पुलिस केस चलने से कैंसिल हो सकती है इंश्योरेंस पॉलिसी? जानें क्या कहते हैं नियम

Fri, 18 Sep 2026 02:51 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pending Court Trial Insurance Policy Rules: कई बार ऐसा होता है कि जब लोग कोई इंश्योरेंस पॉलिसी लिए होते हैं और बाद में किन्हीं कारणों से उनपर मुकदमा चलने लगता है, तो उनके दिमाग में सवाल आता है कि क्या अब उनका बीमा क्लेम नहीं मिलेगा? आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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पुलिस केस और इंश्योरेंस पॉलिसी - फोटो : AI
Does Police Case Cancel Insurance Policy: आम लोगों के बीच अक्सर यह गलतफहमी देखी जाती है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस केस या कोर्ट में मुकदमा शुरू होते ही उसकी इंश्योरेंस पॉलिसी अपने आप कैंसिल हो जाती है। कानूनन सिर्फ एफआईआर दर्ज होने या मुकदमा लंबित रहने मात्र से कोई भी बीमा पॉलिसी खुद-ब-खुद खत्म नहीं होती है।

हालांकि, इसका यह मतलब भी नहीं है कि कोर्ट केस का क्लेम पर कोई असर नहीं पड़ता। किसी भी दावे का फैसला आपराधिक मुकदमे से ज्यादा बीमा अनुबंध, उसकी शर्तों और घटना की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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जानकारी छिपाने पर कैंसिल हो सकती है पॉलिसी - फोटो : Adobe Stock
जानकारी छिपाने पर पॉलिसी पर पड़ता है असर
  • बीमा लेते समय फॉर्म में मांगी गई हर जरूरी जानकारी सच-सच देना अनिवार्य होता है।
  • अगर आपने अपने ऊपर चल रहे आपराधिक मामले या जोखिम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई है, तो कंपनी बीमा अधिनियम की धारा 45 और पॉलिसी टर्म्स के तहत इसका असर क्लेम पर पड़ सकता है।
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घटना और अपराध के संबंध की जांच - फोटो : Adobe Stock
घटना और अपराध के संबंध की जांच
  • सिर्फ केस चलना ही क्लेम खारिज करने की वजह नहीं बनता, बल्कि नुकसान का कारण देखा जाता है।
  • अगर आपकी चोट, बीमारी या मृत्यु किसी ऐसी गैर-कानूनी गतिविधि के कारण हुई है जो पॉलिसी की एक्सक्लूजन सूची में आती है, तो बीमा कंपनी पॉलिसी की शर्तों का हवाला देकर दावा देने से इनकार कर सकती है।

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हेल्थ इंश्योरेंस पर नियम और प्रभाव - फोटो : ANI
हेल्थ इंश्योरेंस पर नियम और प्रभाव
  • अगर किसी व्यक्ति पर कोर्ट केस चल रहा है और उसे अचानक इलाज की जरूरत पड़ती है, तो उसका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सिर्फ मुकदमे के आधार पर रोका नहीं जा सकता।
  • जब तक अस्पताल में भर्ती होने की वजह पॉलिसी के नियमों और शर्तों के दायरे में आती है, तब तक बीमा कंपनी को नियमानुसार क्लेम का भुगतान करना पड़ता है।
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अदालत का फैसला बनाम पॉलिसी की शर्तें - फोटो : अमर उजाला
अदालत का फैसला बनाम पॉलिसी की शर्तें
  • यह सोचना गलत है कि जब तक कोर्ट दोषी न ठहरा दे, तब तक कंपनी क्लेम खारिज नहीं कर सकती।
  • दरअसल, आपराधिक मामले में दोषी या निर्दोष साबित होना एक अलग कानूनी प्रक्रिया है, जबकि बीमा कंपनी सिर्फ अपने लिखित समझौते और पॉलिसी शर्तों के आधार पर क्लेम पास या रिजेक्ट करती है।
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