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हेल्थ इंश्योरेंस के ये हिडन रूल्स क्या आप जानते हैं? क्लेम मिलने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

Fri, 30 Oct 2026 05:27 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • Medical Claim Tips And Terms: हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले हमेशा कुछ बातें अच्छे से समझ लेनी चाहिए, जैसे कि आपका पॉलिसी किस तरह है फुल पेमेंट वाला है या डिड्कटेबल है या फिर को पेमेंट तो नहीं है।
  • कई बार लोग जल्दबाजी में पॉलिसी खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें बिल पेमेंट के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है। 
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हेल्थ इंश्योरेंस के नियम - फोटो : Amar Ujala
Health Insurance Hidden Rules: आज के समय में महंगे इलाज और अस्पताल के खर्चों से बचने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना बहुत जरूरी हो गया है। लोग बड़ी उम्मीद से हर साल समय पर प्रीमियम भरते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बीमा का पूरा लाभ मिल सके। लेकिन जब अस्पताल में भर्ती होने के बाद क्लेम करने की बारी आती है, तो कई बार कंपनियों द्वारा क्लेम खारिज कर दिया जाता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर लोग पॉलिसी लेते वक्त उसके छोटे अक्षरों में लिखे नियमों और शर्तों को ठीक से नहीं पढ़ते हैं। अगर आप भी अपने स्वास्थ्य बीमा का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं और अस्पताल में किसी भी परेशानी से बचना चाहते हैं, तो बीमा से जुड़े इन हिडेन और जरूरी नियमों को पहले ही जान लेना बहुत समझदारी का काम होगा।
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वेटिंग पीरियड क्या होता है? - फोटो : Adobe Stock
वेटिंग पीरियड क्या होता है?
  • नया हेल्थ इंश्योरेंस लेने के तुरंत बाद सभी बीमारियों का कवर नहीं मिलता है।
  • कुछ पुरानी बीमारियों या खास ऑपरेशनों के लिए कंपनियों का एक तय वेटिंग पीरियड होता है, जिसके पूरा होने से पहले क्लेम नहीं मिलता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
रूम रेंट कैपिंग क्या है?
  • अस्पताल में भर्ती होने पर कमरे का किराया आपके कुल बीमा कवर से जुड़ा होता है।
  • अगर आप तय सीमा से महंगे कमरे का चुनाव करते हैं, तो अस्पताल के कुल बिल पर भारी कटौती हो सकती है, जिसका भार आपके जेब पर पड़ता है।

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को-पेमेंट का नियम क्या है? - फोटो : Adobe Stock
को-पेमेंट का नियम क्या है?
  • कभी भी हेल्थ इश्योंरेंस लेने से पहले को-पेमेंट के बारे में जरूर जान लेना चाहिए। 
  • बता दें कि कुछ पॉलिसियों में को-पेमेंट का नियम होता है, जिसके तहत इलाज के कुल खर्च का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 10 या 20 प्रतिशत) ग्राहक को अपनी जेब से ही देना पड़ता है।
  • ऐसे में जब कोई उपभोक्ता को-पेमेंट वाला पॉलिसी लेता है तो उसे बिल पेमेंट के समय कुछ हिस्सा खुद के जेब से भी देना पड़ता है।
  • इसके अलावा डिड्कटेबल के बारे में जान लेना बहुत जरूरी होता है।
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उपभोक्ता को क्या सावधानी रखनी चाहिए? - फोटो : Adobe Stock
उपभोक्ता को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
  • पॉलिसी खरीदते समय उसमें शामिल और बाहर रखी गई (एक्सक्लूजन) बीमारियों की सूची ध्यान से पढ़ें।
  • पॉलिसी लेते समय ये जरूर देख लें कि पॉलिसी फुल पेमेंट वाली है, को-पेमेंट है या डिड्कटेबल है।
  • बता दें कि डिड्कटेबल में शुरुआत का कुछ पैसा पूरी तरह से उपभोक्ता को ही देना पड़ता है।
  • इसके अलावा क्लेम के लिए कभी भी अस्पताल में इलाज के दौरान सभी डॉक्टर के पर्चे और बिल संभाल कर रखें।
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