फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Cyber Crime Alert: ऑनलाइन फ्री में मूवी और सीरीज देख रहे हैं? ये आदत आपको जेल तक ले जा सकती है

Mon, 05 Jan 2026 01:19 PM IST
श्रुति गौड़ यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Cyber Crime Alert: अगर आप भी किसी थर्ड पार्टी एप पर फ्री में फिल्म देखते हैं तो आपको संभलने की जरूरत है। ऐसा करने पर आप जेल जा सकते हैं। 
विज्ञापन
1 of 5
थर्ड पार्टी एप पर फ्री में देखते हैं फिल्में तो संभल जाएं, हो सकती है जेल - फोटो : अमर उजाला
Cyber Crime Alert: आजकल ऑनलाइन एंटरटेनमेंट हर किसी की जरूरत बन चुका है। नई फिल्में और वेब सीरीज देखने के लिए लोग अलग‑अलग तरीके अपनाते हैं। कई बार पैसे बचाने या सब्सक्रिप्शन से बचने के चक्कर में लोग थर्ड‑पार्टी ऐप या वेबसाइट का सहारा ले लेते हैं, जहां फ्री में लेटेस्ट फिल्में आसानी से मिल जाती हैं। शुरुआत में ये तरीका आसान और फायदेमंद लगता है, लेकिन असल में ये एक गलत आदत है, जिसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

बहुत से लोग यह नहीं जानते कि इस तरह के ऐप या वेबसाइट न सिर्फ असुरक्षित होते हैं, बल्कि यूज़र को कानूनी और डिजिटल दोनों तरह की परेशानियों में डाल सकते हैं। इसलिए बिना पूरी जानकारी के ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। यहां हम आपको बताएंगे कि थर्ड पार्टी एप पर फिल्में और सीरीज देखने से आपके ऊपर किस तरह का खतरा मंडराता है।
 
विज्ञापन

2 of 5
थर्ड पार्टी एप पर फ्री में देखते हैं फिल्में तो संभल जाएं, हो सकती है जेल - फोटो : Adobe Stock
कॉपीराइट कानून का होता है उल्लंघन

थर्ड‑पार्टी ऐप्स और वेबसाइट्स पर दिखाई जाने वाली फिल्में और वेब सीरीज आमतौर पर बिना निर्माता या अधिकार धारक की अनुमति के अपलोड की जाती हैं। इसका मतलब यह होता है कि ये कंटेंट गैरकानूनी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। यही वजह है कि सरकार और एजेंसियां ऐसे ऐप्स को ब्लॉक करती रहती हैं और लोगों को इनसे दूर रहने की सलाह देती हैं। जब कोई यूजर ऐसे प्लेटफॉर्म से फिल्म देखता या डाउनलोड करता है, तो वो अनजाने में इस गलत प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है। 

 
विज्ञापन

3 of 5
थर्ड पार्टी एप पर फ्री में देखते हैं फिल्में तो संभल जाएं, हो सकती है जेल - फोटो : Adobe Stock
हो सकती है जेल की सजा

भारत में पायरेटेड कंटेंट से जुड़े मामलों को गंभीर अपराध माना जाता है। सिनेमैटोग्राफ अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत अगर कोई व्यक्ति पायरेटेड फिल्म को डाउनलोड करता है, शेयर करता है या जानबूझकर ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर जेल की सजा और भारी जुर्माना दोनों हो सकते हैं। कई मामलों में पुलिस और साइबर सेल ऐसे यूजर्स तक पहुंचने में सफल भी हुई है।

 

4 of 5
थर्ड पार्टी एप पर फ्री में देखते हैं फिल्में तो संभल जाएं, हो सकती है जेल - फोटो : Adobe Stock
डाटा चोरी का भी रहता है खतरा

थर्ड‑पार्टी ऐप्स अक्सर गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड नहीं होते। ऐसे में इनमें सुरक्षा मानकों की कमी होती है। इन ऐप्स के जरिए मोबाइल या लैपटॉप में वायरस, मैलवेयर या स्पाइवेयर आसानी से घुस सकता है। इससे फोन में मौजूद फोटो, कॉन्टैक्ट्स, बैंकिंग ऐप्स और निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। कई मामलों में यूज़र्स के बैंक अकाउंट से पैसे निकलने या सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
थर्ड पार्टी एप पर फ्री में देखते हैं फिल्में तो संभल जाएं, हो सकती है जेल - फोटो : FREEPIK
इसी वजह से सरकार फैला रही है जागरूकता

सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रही हैं कि फ्री फिल्म देखने का लालच भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकता है। सोशल मीडिया, विज्ञापन और सरकारी प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को बताया जा रहा है कि हमेशा वैध और अधिकृत ओटीटी प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें। जागरूकता का मकसद यही है कि लोग सुरक्षित रहें और किसी भी तरह की कानूनी या डिजिटल परेशानी से बच सकें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें