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e-Sign Guide: फिजिकल सिग्नेचर से कितना अलग है ई-साइन? यहां समझें सब कुछ

Sat, 11 Apr 2026 06:22 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

What is E-Sign India:आज धीरे-धीरे ई-सिग्नेचर का चलन बढ़ता जा रहा है। लोग इसका इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन फिजिकल सिग्नेचर और ई-सिग्नेचर को लेकर कई सवाल रहते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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डिजिटल सिग्नेचर - फोटो : Adobe Stock
Rules Of e-sign In India:  डिजिटल क्रांति के इस दौर में अब कागजों पर पेन से दस्तखत करने की परंपरा धीरे-धीरे पीछे छूट रही है और इसकी जगह 'ई-साइन' लेती जा रही है। अक्सर लोग ई-साइन को सिर्फ फोटो खींचकर चिपकाना समझते हैं, जबकि यह एक हाई-लेवल एन्क्रिप्टेड तकनीक है जो आधार या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट पर आधारित होती है। 

नए आईटी नियमों के अनुसार, ई-साइन को भी फिजिकल सिग्नेचर के लगभग बराबर कानूनी मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसकी कुछ सीमा हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर जरूरी दस्तावेजों को प्रमाणित कर सकते हैं। मगर क्या यह वाकई फिजिकल सिग्नेचर जितना सुरक्षित है? आइए समझते हैं कि ई-साइन कैसे काम करता है और यह हमारे पारंपरिक हस्ताक्षर से किस तरह अलग है।
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डिजिटल सिग्नेचर - फोटो : Adobe Stock
ई-साइन और फिजिकल सिग्नेचर में अंतर
  • फिजिकल सिग्नेचर के लिए आपका वहां मौजूद होना जरूरी है, जबकि ई-साइन मोबाइल या कंप्यूटर से कहीं भी कभी भी किया जा सकता है।
  • ई-साइन को आधार ओटीपी के जरिए तुरंत सत्यापित किया जा सकता है, जबकि हाथ से किए गए दस्तखत के फर्जी होने का खतरा बना रहता है।
  • डिजिटल हस्ताक्षर होने के बाद दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ करना नामुमकिन होता है, क्योंकि कोई भी बदलाव डिजिटल 'सीलिंग' को तोड़ देता है।
 
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डिजिटल सिग्नेचर - फोटो : Adobe Stock
ई-साइन कैसे काम करता है?
  • सबसे पहले आप दस्तावेज अपलोड करते हैं और अपना आधार नंबर दर्ज करते हैं।
  • आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आता है, जो आपकी पहचान की पुष्टि करता है।
  • पुष्टि होते ही एक यूनिक डिजिटल सर्टिफिकेट आपके हस्ताक्षर के रूप में दस्तावेज पर अंकित हो जाता है।

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डिजिटल सिग्नेचर - फोटो : Adobe Stock
ई-साइन के फायदे और सीमाएं
  • इस तकनीक के इस्तेमाल से पहले इसकी खूबियां और पाबंदियां जान लें।
  • आईटी एक्ट 2000 के तहत ई-साइन पूरी तरह वैध है और इसे कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है।
  • इसमें प्रिंटिंग, कूरियर और पेपर का खर्च जीरो हो जाता है, जिससे बिजनेस की लागत घटती है।
  • ध्यान रहे कि वसीयत, पावर ऑफ अटॉर्नी और कुछ अचल संपत्ति के दस्तावेजों पर आज भी फिजिकल सिग्नेचर या अंगूठा ही अनिवार्य है।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
सुरक्षा और सावधानी
  • ई-साइन के लिए आने वाला ओटीपी कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को न बताएं।
  • आज के समय में अधिकांश सरकारी और निजी काम ई-साइन से ही हो रहे हैं, इसलिए इस तकनीक को समझना आज की जरूरत है।
  • हमेशा सरकारी मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म के जरिए ही ई-साइन की प्रक्रिया पूरी करें।
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