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Charm Pricing Secret: ज्यादातर सामान की कीमत के लास्ट में 9 या 99 क्यों होता है? यहां जानें इसके पीछे का कारण

Wed, 10 Jun 2026 01:13 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Charm Pricing Strategy: अक्सर ये देखने को मिलता है कि मॉल या दुकानों में मिलने वाले ज्यादातर सामान की कीमतें 99 या 999 से ही खत्म होती हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि इसके दुकानदारों की इसके पीछे क्या स्ट्रेटजी होती है। और वो कैसे इस जाल में ग्राहकों को आकर्षित करते हैं।  
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₹99 प्राइसिंग का सच - फोटो : AI
Why Prices End in 99: हम जब भी किसी मॉल, बाजार या ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर जाते हैं, तो अपनी जेब और बजट का हिसाब सबसे पहले लगाते हैं। कंपनियां हमारे इसी बजट वाले मनोविज्ञान को बहुत अच्छे से समझती हैं। यही वजह है कि शॉपिंग करते समय हमें हर छोटे-बड़े सामान की कीमत के पीछे '99' का एक जादुई आंकड़ा दिखाई देता है, जैसे ₹99, ₹199 या ₹499।

क्या आपने कभी सोचा है कि कंपनियां इन कीमतों को राउंड फिगर में ₹100, ₹200 या ₹500 क्यों नहीं लिखतीं? पहली नजर में यह सिर्फ एक रुपये का मामूली अंतर लगता है, लेकिन इसके पीछे कोई अंधविश्वास या इत्तेफाक नहीं है। दरअसल, यह बड़ी-बड़ी कंपनियों का एक बहुत ही सोचा-समझा दिमागी खेल और बिजनेस स्ट्रेटेजी है। आइए इस लेख में समझते हैं कि कैसे सिर्फ ₹1 कम करके कंपनियां हमारे दिमाग से खेलती हैं और हमें सामान खरीदने पर मजबूर कर देती हैं।
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लेफ्ट-डिजिट इफेक्ट और इंसानी दिमाग - फोटो : Adobe Stock
लेफ्ट-डिजिट इफेक्ट और इंसानी दिमाग
  • हमारा दिमाग किसी भी कीमत को हमेशा बाएं से दाएं पढ़ता है। 
  • जब हम ₹499 देखते हैं, तो हमारा दिमाग पहली संख्या '4' पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे हमें लगता है कि सामान ₹400 के आस-पास का है, भले ही वह ₹500 से सिर्फ एक रुपया ही कम क्यों न हो।
  • सिर्फ ₹1 कम होने की वजह से हमारा दिमाग भ्रमित हो जाता है और उसे वह सामान ₹500 के मुकाबले काफी सस्ता लगने लगता है।
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चीज का सस्ता और किफायती लगना - फोटो : Adobe stock
चीज का सस्ता और किफायती लगना
  • मार्केटिंग की भाषा में इसे 'चार्म प्राइसिंग' कहा जाता है। 
  • कंपनियों को पता होता है कि गोल-मटोल आंकड़े जैसे ₹500 या ₹1,000 ग्राहकों को मनोवैज्ञानिक रूप से महंगे लगते हैं।
  • वहीं, आखिर में 99 होने से ग्राहकों को लगता है कि वे एक अच्छी डील पा रहे हैं और सामान बजट में है।

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एक रुपये के बहाने करोड़ों का मुनाफा - फोटो : Adobestock
एक रुपये के बहाने करोड़ों का मुनाफा
  • बहुत से ग्राहक काउंटर पर ₹1 वापस नहीं मांगते या छुट्टा न होने पर छोड़ देते हैं। 
  • यह ₹1 भले ही आपको छोटा लगे, लेकिन जब दुकान पर या मॉल में आने वाले अधिकतर ग्राहक वो 1 रुपया मांगते ही नहीं हैं, जिससे कंपनियों के खाते में बिना टैक्स के हजारों रुपये का अतिरिक्त मुनाफा सीधे जमा हो जाता है।
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'ऑड नंबर' का भरोसा और ईमानदारी - फोटो : Adobe stock
'ऑड नंबर' का भरोसा और ईमानदारी
  • रिसर्च बताती है कि जब किसी सामान की कीमत ₹793 या ₹99 जैसी अजीब या 'ऑड' संख्या में तय की जाती है, तो ग्राहकों को लगता है कि कंपनी ने बहुत सोच-समझकर और ईमानदारी से सही दाम लगाया है। 
  • राउंड फिगर वाली कीमतें लोगों को थोड़ी बनावटी या बढ़ा-चढ़ाकर रखी गई लगती हैं।
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