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क्या वसीयत के जरिए बेटियों को पिता की संपत्ति से पूरी तरह बेदखल किया जा सकता है? जानें नियम

Wed, 30 Sep 2026 02:25 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Daughter Property Rights: अक्सर लोगों के मन में ये सवाल होता है कि क्या पिता के संपत्ति से बेटी को बेदखल किया जा सकता है? बहुत से लोगों के मन में इसके जवाब को लेकर कई भ्रम होते हैं। बता दें कि इसका जवाब सिर्फ हां या ना में नहीं दिया जा सकता है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम - फोटो : AI
Hindu Succession Act Rules: भारतीय समाज में पिता की संपत्ति में बच्चों के अधिकार को लेकर अक्सर कई तरह की भ्रांतियां देखने को मिलती हैं। अक्सर ये देखने को मिलता है कि हमारे समाज में लड़कों को ही पिता के संपत्ति का उत्तराधिकार मानते हैं। अब ये बात अधिकतर लोगों को मालूम है कि पिता की संपत्ति में बेटों के जैसे बिटियों का भी बराबर अधिकार होता है। ऐसे में कुछ लोगों के दिमाग में ये सवाल आता है कि क्या वसीयत के माध्यम से सारी संपत्ति बेटे को नहीं दे सकते? 

बता दें कि इसका जवाब बिल्कुल सीधा नहीं है। वसीयत के माध्यम से पिता अपने बेटे को संपत्ति दे तो सकते हैं मगर इसकी कुछ शर्तें हैं, जिसके बारे में सभी लोगों को जानना चाहिए। ये समझना जरूरी है कि कोई पिता अपनी बेटी को बेदखल कर सकता है या नहीं, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति स्व-अर्जित है या पैतृक।
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स्व-अर्जित संपत्ति पर पिता का पूर्ण अधिकार - फोटो : Adobe Stock
स्व-अर्जित संपत्ति पर पिता का पूर्ण अधिकार
  • अगर संपत्ति पिता ने अपनी कमाई से खुद खरीदी है, तो उस पर उनका पूरा अधिकार होता है।
  • पिता चाहें तो अपनी बनाई वसीयत के जरिए बेटी को इस संपत्ति से पूरी तरह बेदखल कर सकते हैं।
  • लेकिन अगर बिना वसीयत बनाए पिता की मृत्यु होती है, तो बेटी को बराबर का हिस्सा मिलता है।
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पैतृक संपत्ति में बेटियों का जन्मसिद्ध अधिकार - फोटो : Adobe Stock
पैतृक संपत्ति में बेटियों का जन्मसिद्ध अधिकार
  • दादा या परदादा से मिली पैतृक (पुश्तैनी) संपत्ति के मामले में कानून बिल्कुल अलग है।
  • इस तरह की संपत्ति पर बेटी का जन्म से ही बेटों के बराबर अधिकार होता है।
  • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के अनुसार, पिता चाहकर भी वसीयत के जरिए बेटी को उसके पुश्तैनी हिस्से से बेदखल नहीं कर सकते हैं।

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2005 का ऐतिहासिक कानूनी संशोधन - फोटो : Adobe Stock
2005 का ऐतिहासिक कानूनी संशोधन
  • वर्ष 2005 में हिंदू उत्तराधिकार कानून में हुए संशोधन ने बेटियों को बेटों के बराबर 'सह-दायाद' का दर्जा दिया है।
  • इसका मतलब है कि जन्म लेते ही बेटी को परिवार की पैतृक संपत्ति में कानूनी हक मिल जाता है, जिसे किसी भी वसीयत या समझौते से छीना नहीं जा सकता।
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अधिकार पाने के लिए क्या करें बेटियां - फोटो : Adobe Stock
अधिकार पाने के लिए क्या करें बेटियां
  • अगर किसी बेटी को उसकी पैतृक संपत्ति के कानूनी हक से बेदखल किया जा रहा है या फर्जी वसीयत बनाई गई है, तो वह अदालत में अपनी सुरक्षा के लिए केस दायर कर सकती है।
  • स्व-अर्जित और पैतृक संपत्ति के फर्क को समझकर बेटियां अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा आसानी से कर सकती हैं।
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