Alternative Option For Cooking: एलपीजी गैस की किल्लत का असर अब देशभर के कई शहरों में देखने को मिल रहा है। छोटे-छोटे दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने को मजबूर हैं। ऐसे समय में उन्हें क्या करना चाहिए, आइए आपको बताते हैं।
विज्ञापन
1 of 6
गैस सिलिंडर न हो तो क्या करें?
- फोटो : Adobe stock
LPG Gas Ke Bina Dukan Kaise Chalayein: देश में एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति संकट में है और कई छोटे-बड़े खाने-पीने के व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। खासतौर पर खाने-पीने की दुकानों के लिए यह बड़ा चुनौतीपूर्ण समय है, क्योंकि खाने के मार्केट में ग्राहकों की मांग तो लगातार बनी रहती है। कुछ दुकानदारों को सिलिंडर बिल्कुल नहीं मिल रहा है, जिससे रसोई का काम प्रभावित हो रहा है।
अब ये सवाल उठता है कि बिना गैस के भी कैसे दुकान चल सकती है और अपनी आजिविका चलाई जा सकती है। ऐसे में आपको ये समझने की जरूरत है कि सिर्फ कुछ स्मार्ट उपाय अपनाकर, दुकानदार अपनी रसोई को सुचारू रूप से चला सकते हैं और बिजनेस को ठप होने से बचा सकते हैं।
इस लेख में हम बताएंगे कि सिलिंडर ना मिलने की स्थिति में दुकानदार कौन-कौन से विकल्प अपना सकते हैं और गैस रहित तरीके से भी रेस्टोरेंट या खाने-पीने की दुकान कैसे ऑपरेट कर सकते हैं।
विज्ञापन
2 of 6
गैस सिलिंडर न हो तो क्या करें?
- फोटो : Adobe stock
इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल
ये बिजली की मदद से काम करता है और गर्मी सीधे बर्तन तक पहुंचती है, इसलिए खाना जल्दी पकता है।
इंडक्शन स्टोव में खुली आग नहीं होती, जिससे रसोई में सुरक्षा बढ़ती है और साफ-सफाई भी आसान होती है।
छोटे रेस्टोरेंट या ढाबों में इसे इंस्टॉल करना आसान है और यह बिना गैस के रसोई को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है।
बड़े बर्तन या भारी मात्रा में खाना पकाने के लिए उच्च क्षमता वाले इंडक्शन कुकटॉप का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहता है।
विज्ञापन
3 of 6
गैस सिलिंडर न हो तो क्या करें?
- फोटो : Adobe stock
चूल्हा बनाएं
जब गैस और बिजली दोनों सीमित हों, तो चूल्हा बनाना अस्थायी समाधान हो सकता है।
मिट्टी, ईंट या स्टील के छोटे स्टोव बनाए जा सकते हैं और लकड़ी, कोयला या बायोमास जैसे वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह बड़े बर्तन या स्टॉक्स गर्म करने के लिए उपयुक्त होता है।
4 of 6
गैस सिलिंडर न हो तो क्या करें?
- फोटो : Adobe stock
तंदूर का इस्तेमाल
तंदूर छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों के लिए बेहतरीन विकल्प है, खासकर अगर रोटियां, नान या टिक्का जैसी चीज़ें परोसनी हों।
एलपीजी की किल्लत के बीच बिजली या कोयला तंदूर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
तंदूर में खाना जल्दी पकता है और यह स्वाद और बनावट में पारंपरिक स्वाद बनाए रखता है।
विज्ञापन
5 of 6
गैस सिलिंडर न हो तो क्या करें?
- फोटो : Adobe stock
इन बातों का ध्यान रखें
तंदूर और चूल्हा इस्तेमाल करने में कुछ चुनौतियां भी होती हैं। सबसे पहले दोनों में आग या उच्च तापमान होता है, जिससे सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। कोयला या लकड़ी से चलने वाले चूल्हे और तंदूर से धुआं निकलता है, जो प्रदूषण का कारण बना सकता है और वेंटिलेशन की आवश्यकता बढ़ा देता है।
इसके अलावा ये दोनों विकल्प बिजली या गैस की तरह तेज़ नियंत्रण नहीं देते, इसलिए खाना पकाने में समय ज्यादा लग सकता है और तापमान स्थिर रखना मुश्किल हो सकता है। बड़े पैमाने पर खाना पकाने में ऊर्जा की खपत भी अधिक होती है और सफाई का काम बढ़ जाता है। इसलिए अगर आप इनमें से किसी विकल्प को चुन रहे हैं तो पहले अपनी रसोई और आस-पास की जगह को अच्छे से देख लें और समझ लें।