Airline Dare Increase Due To Holi Festival: होली की वजह से फ्लाइट टिकट के किराये में अचानक काफी वृद्धि हुई है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से उत्तर और मध्य भारत के गंतव्यों के लिए किराए में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है।
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होली पर हवाई किराया 2-3 गुना बढ़ा! यात्रियों में बढ़ी नाराजगी
- फोटो : अमर उजाला
Airline Fare Increase Due To Holi Festival: होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले देश के कई प्रमुख रूट्स पर हवाई किरायों में जबरदस्त बढ़ोतरी ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। अलग-अलग शहरों से मिल रही जानकारी के अनुसार कई मार्गों पर टिकट की कीमतें सामान्य दिनों की तुलना में 2–3 गुना तक अधिक वसूली जा रही हैं।
ऐसे में त्योहार के दौरान घर लौटने की मजबूरी और सीमित सीटों के कारण यात्रियों को महंगे किराए पर टिकट बुक करने पड़ रहे हैं। फिलहाल स्थिति यही है कि त्योहार के करीब आते-आते टिकट की कीमतें ऊंचाई पर बनी हुई हैं। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि वर्तमान समय में लोगों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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होली पर हवाई किराया 2-3 गुना बढ़ा! यात्रियों में बढ़ी नाराजगी
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प्रमुख रूट्स पर क्या है स्थिति?
यात्रियों और ट्रैवल पोर्टल्स के आंकड़ों के अनुसार बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से उत्तर और मध्य भारत के गंतव्यों के लिए किराए में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है। उदाहरण के तौर पर:
बेंगलुरु–पटना रूट पर सामान्य दिनों में जहां टिकट 5,000 से 7,000 रुपये के बीच मिल जाता है, वहीं त्योहार के नजदीक कीमत 11,000 से 13,000 रुपये तक पहुंच गई।
बेंगलुरु से गोरखपुर जाने वाली फ्लाइट का आज का किराया 18000 से भी ज्यादा है।
मुंबई–पटना मार्ग पर किराया 6,500–7,000 रुपये से बढ़कर 12,000–17,000 रुपये तक पहुंच गया।
दिल्ली–पटना के लिए भी लगभग 18 हजार और दिल्ली–जयपुर जैसी छोटी फ्लाइट के लिए 13 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
यात्रियों का कहना है कि कुछ ही घंटों के भीतर किराए में हजारों रुपये का अंतर दिखाई दे रहा है। कई लोगों ने शिकायत की कि सुबह देखी गई कीमत शाम तक दोगुनी हो गई। अब जैस-जैसे होली का त्योहार नजदीक आ रहा है, टिकट के दाम और ज्यादा बढ़ते जा रहे हैं। वहीं एयर कंपनियों ने इस बढ़ोत्तरी की जिम्मेदारी डायनामिक फेयर को दी है।
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अब जानते हैं कि ये ‘डायनामिक फेयर’ सिस्टम क्या है?
एयरलाइंस का तर्क है कि टिकट की कीमतें मांग और उपलब्धता के आधार पर तय होती हैं। इसे ‘डायनामिक फेयर सिस्टम’ कहा जाता है। जब किसी विशेष तारीख या रूट पर मांग बढ़ जाती है और सीटें तेजी से भरने लगती हैं, तो किराया अपने आप बढ़ जाता है।
एयरलाइंस के अनुसार:
पहले से बुकिंग करने पर कम किराया मिलता है।
आखिरी समय में टिकट लेने पर कीमत अधिक होती है।
त्योहार, छुट्टियां और लंबा वीकेंड किराया बढ़ने के मुख्य कारण हैं।
हालांकि यात्रियों का आरोप है कि सिस्टम की आड़ में मनमानी वसूली हो रही है और पारदर्शिता की कमी है।
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60% रूट एक ही कंपनी के पास
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ लोकप्रिय रूट्स पर लगभग 60% क्षमता एक ही एयरलाइन के पास है। प्रतिस्पर्धा कम होने से किराए नियंत्रित नहीं रह पाते। जब विकल्प सीमित होते हैं तो यात्रियों के पास महंगा टिकट लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
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संसद और अदालत तक पहुंचा मामला
हवाई किरायों में बेतहाशा वृद्धि का मुद्दा संसद में भी उठाया गया। कई सांसदों ने नागर विमानन मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है। बताया जा रहा है कि लगभग 15 सांसदों ने इस संबंध में पत्र लिखकर किराया नियंत्रण तंत्र मजबूत करने की अपील की। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर कर त्योहारों के दौरान अधिकतम किराया सीमा तय करने की मांग की गई है। फिलहाल अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।
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सरकार क्या कर सकती है?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि:
त्योहारों के दौरान किराए की अधिकतम सीमा तय की जाए।
डायनामिक फेयर सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
रूट आवंटन और स्लॉट वितरण में प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जाए।
किराया निगरानी के लिए स्वतंत्र मॉनिटरिंग तंत्र बनाया जाए।
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यात्रियों की मुश्किलें क्या हैं?
त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में कामकाजी लोग महानगरों से अपने गृह राज्यों की ओर लौटते हैं। ट्रेन टिकट वेटिंग में होने या कन्फर्म न मिलने की स्थिति में लोग फ्लाइट का सहारा लेते हैं। लेकिन अचानक बढ़े किराए ने मध्यमवर्गीय यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।अब नजर इस बात पर है कि सरकार और नियामक संस्थाएं इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती हैं और क्या आने वाले समय में त्योहारों के दौरान यात्रियों को राहत मिल पाती है या नहीं।