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Victory over Injury: गंभीर चोट के बाद वापसी करने वाले कोल्बी अकेले नहीं, जानें सचिन, युवराज और पटौदी जैसे दिग्गजों की कहानी

Thu, 10 Feb 2022 02:27 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोल्बी स्टीवेन्सन ने शीतकालीन ओलंपिक में रजत पदक जीता है। छह साल पहले कार दुर्घटना में उनके सिर की 30 हड्डियां टूट गई थीं। इसके बाद किसी ने यह उम्मीद नहीं की थी कि कोल्बी ओलंपिक में मदक जीतेंगे।
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चोट से उबरकर कमाल करने वाले खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
शीतकालीन ओलंपिक में अमेरिका के कोल्बी स्टीवेन्सन ने पुरुषों की फ्रीस्टाइल स्कीइंग बिग एअर प्रतिस्पर्धा में बुधवार को रजत पदक जीता। 24 वर्षीय कोल्बी छह साल पहले कार दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने उम्मीद नहीं की थी कि वह कभी भी ओलंपिक खेल पाएंगे। हालांकि, उन्होंने न सिर्फ शीतकालीन ओलंपिक में बाग लिया बल्कि रजत पदक भी अपने नाम किया। कोल्बी अकेले ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं, जिन्होंने गंभीर चोट से जूझने के बाद सफलता हासिल की है। उनसे पहले सचिन तेंदुलकर, नवाब पटौदी, मारिया सारापोवा और टाइगर वुड्स जैसे खिलाड़ी भी चोट से लड़कर सफलता हासिल कर चुके हैं। 
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1. कोल्बी स्टीवेन्सन

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कोल्बी स्टीवेन्सन - फोटो : twitter@Athlete365
साल 2016 में कोल्बी स्टीवेन्सन सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे। इस दुर्घटना में उनके सिर की 30 हड्डियां टूट गई थीं। इसके अलावा उनके नाक, जबड़ा और आंख में गंभीर चोट लगी थी। कोल्बी, जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह जिंदा बचेंगे। हालांकि, पांच महीने बाद ही उन्होंने फिर से स्कीइंग शुरू कर दी। अपने जज्बे के दम पर कोल्बी ने अपनी पुरानी लय हासिल की और 2022 शीतकालीन ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम किया। 
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2. नवाब पटौदी

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नवाब पटौदी - फोटो : espn
20 साल की उम्र में नबाव पटौदी का भीषण कार एक्सीडेंट हुआ था। इस दुर्घटना में कार का शीशा उनकी दाईं आंख में जा घुसा था। इसके बाद उनकी वह आंख खराब हो गई थी और छह महीने तक वह बिस्तर पर रहे थे। डॉक्टरों ने उन्हें क्रिकेट खेलने से मना कर दिया था, लेकिन इसके पांच महीने बाद ही पटौदी ने अपने करियर का पहला मैच खेला। बल्लेबाजी करते समय उन्हें दो गेंदें दिखाई देती थीं, लेकिन उन्होंने तय किया कि जो गेंद अंदर आएगी, उसी पर शॉट खेलेंगे। वो बल्लेबाजी के दौरान टोपी से अपनी दाईं आंख छिपा लेते थे। इससे उन्हें एक ही गेंद दिखती थी। पटौदी ने 40 टेस्ट में भारत की कप्तानी की और नौ मैचों में टीम इंडिया को जीत दिलाई, जबकि 19 में हार का सामना करना पड़ा। 

3. मारिया शारापोवा

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मारिया शारापोवा
टेनिस स्टार मारिया शारोपोवा को साल 2008 में कंधे की चोट लगी थी। टेनिस जगत में उस समय तक कोई भी दूसरा खिलाड़ी इतनी गंभीर चोट से ऊबर कर मैच नहीं खेल पाया था। हालांकि, शारापोवा ने न सिर्फ इस चोट के बाद वापसी की बल्कि तीन साल के अंदर ही वह दुनिया की नंबर एक टेनिस खिलाड़ी बन गईं। उन्होंने अपने करियर में 40 मिलियन डॉलर की कमाई टेनिस मैच की ईनामी राशि से की। मैच के जरिए कमाई के मामले में वह सिर्फ सेरेना विलियम्स और वीनस विलियम्स से पीछे हैं। 
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4. सेरेना विलियम्स

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सेरेना विलियम्स - फोटो : सोशल मीडिया
2015-16 में सेरेना विलियम्स को लगातार कंधे और घुटने की चोट से जूझना पड़ा था। लगातार चोटिल होने से वह परेशान हो चुकी थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2017 में ऑस्ट्रेलियन ओपेन अपने नाम किया। इसके साथ ही उन्होंने सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीतने की रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके बाद सेरेना चार अलग-अलग दशकों में टेनिस का खिताब जीतने वाली खिलाड़ी बनीं। मां बनने के बाद उन्होंने 2020 में एएसबी क्लासिक अपने नाम किया। 
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5. टाइगर वुड्स

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टाइगर वुड्स
गोल्फ स्टार टाइगर वुड्स भी गंभीर रूप से चोटिल होने के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। वुड्स के बाएं पैर में बड़ी चोट लगी थी और इसके बाद उन्हें लग रहा था कि वह फिर से मैदान पर वापसी नहीं कर पाएंगे। हालांकि, टाइगर के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने 2018 और 2019 में अच्छा प्रदर्शन किया और पीजीए टूर में अपनी जगह बनाई। इसके बाद 2018 में उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की। यह उनका 80वां पीजीए था। 
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6. युवराज सिंह

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युवराज सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
2011 विश्व कप में भारत को विश्व विजेता बनाने वाले युवराज सिंह कैंसर से पीड़ित हुए थे। विश्व कप के दौरान ही युवराज को परेशानी हो रही थी और उल्टी भी हो रही थी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। भारत के विश्व कप जीतने के बाद युवराज डॉक्टर से मिले तो उन्हें पता चला कि वह कैंसर से पीड़ित हैं। हालांकि, युवराज ने कैंसर के खिलाफ जंग जीत ली। लंबे समय तक इलाज और कीमोथेरिपी के बाद युवी ठीक हो गए और मैदान पर वापस लौटे। इसके बाद उन्होंने भारत के लिए 2014 टी-20 विश्वकप और 2017 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भी खेलीं।  
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7. सचिन तेंदुलकर

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सचिन तेंदुलकर - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2004 में सचिन को टेनिस एल्बो की समस्या हुई थी। इसकी वजह से तेंदुलकर बैट तक नहीं उठा पाते थे। उनके हाथ में असहनीय दर्द होता था। इस वजह से सचिन को लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था। सचिन को इस समय यह भी लग रहा था कि उनका करियर मानो खत्म हो चुका है। कई बार सचिन इंजेक्शन लगवाकर मैदान में उतरे और बल्लेबाजी की। अब उनके पास ऑपरेशन कराने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। ऑपरेशन के चार-पांच महीने बाद सचिन ने श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच खेला और इस समय उन्हें महसूस हुआ कि वो सही से बल्लेबाजी कर पा रहे हैं। 

टेनिस एल्बो से उबरने के बाद सचिन ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। उन्होंने वनडे क्रिकेट में पहला दोहरा शतक लगाया और सौ शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। 
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