तबाबी देवी
फिर क्या था, तबाबी को तो जुडो से प्यार था। उन्होंने बिना किसी को बताए अपनी ट्रेनिंग जारी रखी और अब देश का नाम विश्वस्तर पर रोशन किया। तबाबी देवी ने कहा, 'मैं माता-पिता को बिना बताए ट्रेनिंग करती थी। जब उन्हें पहली बार पता चला तो उन्होंने कहा कि मुझे इजाजत नहीं दी। वो पूछते थे, 'तुम जुडो क्यों करती हो, चोट लग सकती है? पढ़ाई करो या कुछ और करो। कई बार उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश भी की, लेकिन मैं भाग जाती थी। वो गुस्सा होते थे, लेकिन मुझे जुडो से प्यार है।'