साल 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान स्टेडियम में खाली पड़ी सीटों को देखकर लोगों को आश्चर्य हो रहा था कि इतने बड़े खेल आयोजन को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ स्टेडियम में नहीं उमड़ रही थी। तब यह कहा गया कि भारत में खेल संस्कृति का न होना इसका कारण है।
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क्यों फलॉप-शो साबित हो रहा है रियो ?
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रियो ओलंपिक
- फोटो : rio2016.com
कुछ ऐसी ही स्थिति ब्राजील में आयोजित हो रहे ओलंपिक खेलों में भी दिखाई दे रही है। फुटबॉल के मुकाबलों को छोड़कर अन्य खेलों में अधिकांश सीटें खाली पड़ी हैं। खेलों के इस महाकुंभ में दुनिया के 205 देशों के 10 हजार से ज्यादा एथलीट भाग ले रहे हैं।
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Rio 2016
- फोटो : Getty
एक तरफ आयोजक दावा कर रहे हैं कि खेलों की 75 लाख टिकटों में से 84 प्रतिशत बिक चुकी हैं लेकिन स्टेडियमों में खाली पड़ी सीटें अलग ही कहानी बयां कर रही हैं।यहां बड़े पैमाने पर टिकटों की काला
बाजारी भी हो रही है।
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सरदार सिंह
स्टेडियमों के शहर से दूर होने के कारण भी लोग खेलों का लुत्फ उठाने नहीं जा पा रहे हैं। ब्राजील के दूसरे सबसे बड़े शहर में दर्शकों को स्टेडियम तक पहुंचने के लिए यातायात के बहुत से संसाधनों का उपयोग करना पड़ रहा है। दर्शकों के स्टेडियम में नहीं पहुंचने के बड़ा कारण यह भी है कि यहां हॉकी और रग्बी सेवेन जैसे खेल फुटबॉल की तरह लोकप्रिय नहीं हैं।
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- फोटो : getty images
यहां तक कि बड़े से बड़े सितारों की उपस्थिति के बावजूद लोगों में टेनिस को लेकर भी उत्साह नहीं है। स्टेडियम के कुछ हिस्से स्पॉन्सर्स के लिए आरक्षित हैं। ऐसे दर्शक भी स्टेडियम में नहीं पहुंच रहे हैं।
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जीका वायरस
- फोटो : concept photos
जीका वायरस भी परेशानी का सबब बना हुआ है। जीका के डर से अनुमान से बेहद कम संख्या में विदेशी पर्यटक रियो पहुंच रहे हैं।
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isis
हाल ही में रियो में साइकिल ट्रैक के पास हुए बम धमाके के कारण लोगों के मन में आतंकी हमले का डर हो गया है। रियो ओलंपिक भी आईएस आतंकियों के निशाने पर है।
ब्राजील की राजनीतिक अस्थिरता और रियो ओलंपिक के आयोजन का विरोध प्रदर्शन भी दर्शकों के उत्साह में कमी का कारण है। ब्राजील में फिलहाल आर्थिक आपातकाल लागू है।