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स्वप्ना के सोना जीतते ही मां की आंखों में छलके आंसू, अब सरकार ने भी दी दोहरी खुशी

Fri, 31 Aug 2018 12:30 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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स्वप्ना बर्मन
इंडोनेशिया में चल रहे एशियाई खेलों में हेप्टाथलन में देश के लिए पहली बार स्वर्ण पदक जीतने वाली स्वप्ना बर्मन को राज्य सरकार 10 लाख रुपये का नकद इनाम और सरकारी नौकरी देगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को इसका एलान किया। पश्चिम बंगाल एथेलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव कमल मैत्र ने बताया कि पर्यटन मंत्री गौतम देब ने गुरुवार को जलपाईगुड़ी जाकर स्वप्ना के घरवालों से मुलाकात की और फोन पर मुख्यमंत्री से स्वप्ना की मां की बात कराई। 
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स्वप्ना बर्मन
मैत्र ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वप्ना को 10 लाख रुपये नकद इनाम के साथ ही सरकारी नौकरी देने का भी एलान किया है। देब ने स्वप्ना के घर पर लगभग आधा घंटा बिताया और उन्होंने भी परिवार को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया। मैत्र ने बताया कि स्वप्ना तीन या चार सितंबर को स्वदेश लौटेगी। एसोसिएशन जलपाईगुड़ी के इस गोल्डन गर्ल का अभिनंदन समारोह आयोजित करने की योजना बना रहा है।
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स्वप्ना बर्मन
जलपाईगुड़ी के गरीब परिवार की 21 साल की स्वप्ना ने जकार्ता में 6026 के अपने निजी सर्वश्रेष्ठ स्कोर के साथ देश को हेप्टाथलन में पहला स्वर्ण पदक दिला कर नया इतिहास रच दिया। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली समेत तमाम लोग स्वप्ना को इस उपलब्धि के लिए लगातार बधाई दे रहे हैं। स्वप्ना बेहद गरीबी में पली-बढ़ी है और अपनी मेहनत व लगन के बूते उसने यह मुकाम हासिल किया है। खराब जूतों की वजह से उसे दौड़ने में काफी दिक्कत होती थी।

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स्वप्ना बर्मन
स्वप्ना के पिता पंचानन बर्मन एक रिक्शा वैन चला कर अपने परिवार का पेट पालते थे। लेकिन दिल का दौरा पड़ने के बाद अब वे घर पर ही रहते हैं। उसकी मां बासना देवी दूसरों के घर में बर्तन मांजती है और चाय बागान में पत्तियां तोड़ती है। खेलों के प्रति अपनी सबसे छोटी बेटी की दिलचस्पी देख कर स्वप्ना के पिता अपने कच्चे मकान के पीछे खेतों में बांस की बल्लियां गाड़ देते थे ताकि सपना ऊंची कूद का अभ्यास कर सके। 
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स्वप्ना बर्मन
स्कूल से लौटने के बाद वह वहीं अभ्यास करती थीं। स्कूली प्रतियोगिता में ऊंची कूद में पहला स्थान हासिल करने के बाद स्वप्ना की मां भी लगातार उसका हौसला बढ़ाती रहती थीं। उसकी मां उसे जलपाईगुड़ी खेल परिसर मैदान में छोड़ आती थीं ताकि उसके अभ्यास में खलल नहीं पडे़। स्वप्ना को यहां तक पहुंचाने में उसके कोच सुभाष सरकार की भी अहम भूमिका रही है।
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