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घर में थे कभी खाने के लाले, गौशाला में गुजारी थीं रातें और अब देश को है इनसे गोल्ड की उम्मीद

Sun, 12 Aug 2018 07:09 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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एथलीट खुशबीर कौर
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 18वें एशियन गेम्स के शुरू होने में महज एक हफ्ता से भी कम का समय रह गया है। भारत की तरफ से 543 एथलीट 34 खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। वैसे तो भारत को इस बार अपने सभी एथलीट्स से पदक की उम्मीद है, लेकिन भारत की एक बेटी ऐसी भी है, जो कभी गौशाला में भूखे पेट गुजारी थीं रातें। आइए जानते हैं इनके बारे मेंः
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खुशबीर कौर
जी हां, हम बात कर रहे हैं अमृतसर के रसुलपुर कालन की रहने वाली 25 वर्षीय खुशबीर कौर की। वही, खुशबीर कौर ने जिन्होंने 2014 के एशियन गेम्स में पैदल चाल प्रतियोगिता में भारत को रजत पदक दिलाया था। इस बार के एशियन गेम्स में भारत को उनसे गोल्ड की उम्मीद है। 

 
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खुशबीर कौर
दरअसल, घर में खाने के लाले थे, मां ने लोगों के यहां काम कर करके बेटी को पाला। मगर 2014 के एशियन गेम्स में जीत के बाद आज वो ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, बीते दिन उसे भूले नहीं भुलाते।
 

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खुशबीर कौर
बता दें कि खुशबीर फिलहाल पंजाब पुलीस में डीएसपी हैं। वह बेंगलुरु में आने वाले एशियन गेम्स 2018 के लिए नेशनल कैंप में हिस्सा ले रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में खुशबीर ने अपने बीते दिनों को याद करते हुए काफी बातें शेयर की। इस दौरान उन्होंने कहा, 'काफी मुश्किल भरा सफर रहा है। एक समय जिंदगी में ऐसा भी कि गौशाला में रात गुजारनी पड़ी।'
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खुशबीर कौर
20 किलोमीटर वॉक इवेंट की एथलीट खुशबीर ने बचपन में ही पिता को खो दिया था। मां जसवीर ने परिवार को बमुश्किल पाला। दूसरों के घरों में काम भी करना पड़ा। 2008 में जूनियर नेशनल में खुशबीर इसलिए नंगे पांव दौड़ीं थी, क्योंकि परिवार दौड़ने के लिए महंगे जूते नहीं खरीद सकता था। 
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खुशबीर कौर
खुशबीर कौर की मां बताती है कि, उनका परिवार इतना गरीब था कि वो बारिश से बचने के लिए गौशाला में सोते थे। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें दिन में दो वक्त की रोटी तक नहीं मिल पाती थी। खुशबीर जब महज 6 साल की थीं, तो उनके पिता बलकर सिंह का देहांत हो गया था। उनकी मां ने खुशबीर समेत 4 लड़कियों और एक लड़के को पाला। खुशबीर की मां कपड़े सिलने और गांव में दूध बेचने का काम करती थी। 
 
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खुशबीर कौर
बता दें कि साल 2007 में 14 साल की खुशबीर ने राज्य स्तर का 3000 मीटर रेस दौड़ जीती। एशियाई चैंपियन बलदेव सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनसे ट्रेनिंग लेते हुए खुशबीर अंतराष्ट्रीय सर्किट में हिस्सा लेने लगी। 
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खुशबीर कौर
इससे पहले साल 2010 के यूथ एशियाई खेलों में खुशबीर ने रजत पदक जीता। फिर खुशबीर 2012 में कोलंबो में हुई एशियन जूनियर चैंपियनशिप में दस हजार मीटर में कांस्य पदक जीतकर चर्चा में आईं। खुशबीर के नाम इस प्रतियोगिता में नेशनल रिकॉर्ड दर्ज है।
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