गुकेश को ले जाते हुए
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जश्न नहीं मनाने दिया, एंटी डोपिंग परीक्षण के लिए ले गए
इससे पहले गुकेश को शुरुआती मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था, जबकि दूसरा मुकाबला ड्रॉ रहा था। तीन बाजियों के बाद दोनों दोनों खिलाड़ियों के अब एक समान डेढ़-डेढ़ अंक हैं। जैसे ही यह युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर टूर्नामेंट की अपनी पहली जीत का जश्न मनाने जा रहा था, उन्हें अपने जश्न को मजबूरी में रोकना पड़ा। ग्रैंडमास्टर और मेडिकल प्रोफेशनल झाओ जोंग युआन जो कि एक डोपिंग रोधी परीक्षण के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, 18 वर्षीय गुकेश को बुला लिया और उन्हें परीक्षण के लिए ले गए।
हालांकि, इसके बावजूद गुकेश ने अपना संयम बनाए रखा और स्थिति को शालीनता के साथ संभाला। पुरस्कार विजेता शतरंज खिलाड़ी, कोच और पत्रकार माइक क्लेन, जिन्होंने इस घटना को कैमरे में शूट किया, ने बताया कि डिंग लिरेन को भी कुछ ही समय बाद उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। फिडे नियमों के तहत कभी भी एंटी-डोपिंग परीक्षण आयोजित किए जाते हैं ताकि खेल की अखंडता को बनाए रखा जा सके।
ऐसे होती है चेस में एंटी डोपिंग परीक्षण
इस प्रक्रिया में किसी भी प्रतिबंधित पदार्थों की जांच के लिए जैविक नमूने एकत्र करना शामिल है जो मानसिक ध्यान, सहनशक्ति या प्रतिक्रिया समय को गलत तरीके से बढ़ा सकते हैं। इस बीच फिडे की डोपिंग रोधी परीक्षण नीति में खिलाड़ियों को मूत्र के नमूने जमा कराने होते हैं और ग्रैंडमास्टर निहाल सरीन ने पिछले साल इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। सरीन ने अपने अनुभव के बारे में बात करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था जब उन्हें प्रक्रिया को मंजूरी देने से पहले तीन बार नमूना देना पड़ा था।