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पहलवान बजरंग पूनिया की ख्वाहिश, 'कुश्ती को मिले राष्ट्रीय खेल का दर्जा'

Mon, 28 Jan 2019 07:27 PM IST
Sumit kumar स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया ने कुश्ती को राष्ट्रीय खेल घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि इस खेल ने पिछले तीन ओलंपिक में देश को पदक दिलाए हैं। विश्व चैम्पियनशिप के रजत पदक विजेता बजरंग ने भाषा से कहा, 'कुश्ती ऐसा खेल है जिसने पिछले तीन ओलंपिक में देश को पदक दिए हैं। 2008, 2012 और 2016 में इस खेल से देश को पदक मिला है। जो खेल देश के लिए पदक जीतता है उसे राष्ट्रीय खेल घोषित करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।'
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बजरंग पूनिया
इससे पहले भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह ने सरकार से कुश्ती को राष्ट्रीय खेल बनाने की मांग की थी। भारत में आम तौर पर हाकी को राष्ट्रीय खेल माना जाता रहा है लेकिन सात साल पहले केंद्र सरकार ने एक आरटीआई के जवाब में बताया था कि देश को आठ ओलंपिक स्वर्ण दिलाने वाले इस खेल को राष्ट्रीय खेल का आधिकारिक दर्जा नहीं मिला है।
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बजरंग गणतंत्र दिवस पर पद्म श्री पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल होने से उत्साहित हैं। हालांकि उन्हें अब भी लगता है कि उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिलना चाहिए था। बजरंग ने कहा, 'हर पुरस्कार की अलग अहमियत होती है। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार नहीं मिलने से मैं थोड़ा निराश था लेकिन योगी भाई (योगेश्वर दत्त) ने मुझे खेल पर ध्यान देने का सुझाव दिया।'

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उन्होंने कहा, ' यह जरूर है कि अगर कोई खिलाड़ी पुरस्कार का हकदार है और उसे नहीं मिलता है तो यह खिलाड़ी के मनोबल पर असर डालता हैं। खेल रत्न पुरस्कार में निराशा मिलने के बाद मैंने पद्म श्री के लिए आवेदन किया था। खेल रत्न के लिए मैंने आवेदन इसीलिए किया था क्योंकि मैं उसके योग्य था। मैंने 2014 में भी पदक (विश्व चैम्पियशिप, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में) जीता था। मैं तब भी आवेदन कर सकता था लेकिन उस समय मुझे लगा कि मैं योग्य नहीं हूं। इस बार अंक प्रणाली देखकर मैंने आवेदन किया था जिसमें मेरे सबसे ज्यादा अंक थे।'
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देश को ओलंपिक में इस खिलाड़ी से सबसे ज्यादा उम्मीद है और बजरंग ने कहा कि इतना बड़ा नागरिक पुरस्कार मिलने से उनसे उम्मीदें और बढ़ेंगी। उन्होंने कहा, ' किसी भी खिलाड़ी को कोई सम्मान मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यह सम्मान भारत सरकार देती है तो जाहिर है लोग उम्मीद करेंगे की कि मैं देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना जारी रखूं।'
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बजरंग इन दिनों प्रो कुश्ती लीग में पंजाब रॉयल्स की टीम की कप्तानी कर रहे है। लगातार दो बार चैम्पियन रही यह टीम इस बार भी सेमीफाइनल में पहुंच गयी है। वह इसके बाद इसके बाद जर्मनी में कुश्ती लीग में अपना दमखम दिखाएंगे।
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बजरंग ने कहा, ' जर्मनी में उन्हें दो मुकाबलों में खेलना है जिसमें पहला मुकाबला दो फरवरी को होगा। जर्मनी जाने का मकसद खुद को दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के सामने परखना है। मैं वहां जिन खिलाड़ियों के खिलाफ खेलूंगा , वे ओलंपिक में पदक के दावेदार होंगे। वहां मुझे खुद में सुधार करने का मौका मिलेगा।'

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देश के लिए 65 किलो भारवर्ग में दावेदारी पेश करने वाले बजरंग ने कहा कहा कि उनकी एक बाउट 67 किलो वर्ग के पहलवान और दूसरी 72 किलो वर्ग के पहलवान के खिलाफ है। उन्होंने कहा, ' खुद से ज्यादा वजन के पहलवान के खिलाफ खेलने से मुझे फायदा होगा।' बजरंग ने कहा कि विदेश में अभ्यास करने से उनके खेल में काफी निखार आया है और उनका अगला लक्ष्य विश्व चैम्पियनशिप और ओलंपिक में दमदार प्रदर्शन करना है।
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पिछले साल तबिलिसी ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीतने वाले इस खिलाड़ी ने कहा, ' जॉर्जिया में प्रशिक्षण करने का फायदा यह हुआ कि वहां अभ्यास में काफी अच्छे खिलाड़ी मिलते है। वहां शाको (बेंटिनिडिस) मेरे कोच है। मेरा ध्यान अप्रैल में होने वाली एशियाई चैम्पियनशिप और उसके बाद विश्व चैम्पियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करने पर लगा है। विश्व चैम्पियनशिप पर ज्यादा ध्यान दे रहा हूं क्योंकि वहीं से ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का मौका मिलेगा। मेरा लक्ष्य ओलंपिक में अच्छा करना है।'
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