शार्दुल विहान
दरअसल, शार्दुल जब 6 साल के थे तब उनके पिता दीपक विहान ने बेटे की खेल में रूचि को देखते हुए क्रिकेट क्लब में एडमिशन दिला दिया। करीब एक साल तक शार्दुल ने क्रिकेट क्लब में खेला। मगर उसने अपने पिता को कहा कि वह आगे क्रिकेट नहीं खेलना चाहता क्योंकि उसे फील्डिंग में सबसे पीछे खड़ा किया जाता है। इसके अलावा बल्लेबाजी और गेंदबाजी भी उसे सबसे आखिर में दी जाती है। बेटे की बात सुनकर पिता दीपक ने उसे बैडमिंटन कोच के पास भेज दिया।