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चोट ने खत्म कर दिया था करियर, फिर जी-तोड़ मेहनत के दम पर राही ने एशियन गेम्स में दिलाया गोल्ड

Wed, 22 Aug 2018 05:27 PM IST
खेल डेस्क, अमर उजाला
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एशियन गेम्स के चौथे दिन भारत की राही सरनोबत ने 25 मीटर पिस्टल के फाइनल इवेंट में गोल्ड मेडल दिलाया है। इसी के साथ राही एशियाड की शूटिंग स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यह भारत का मौजूदा एशियन गेम्स में चौथा गोल्ड मेडल है।

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मनु भाकर
इसी इवेंट में भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर ने निराश किया है। फाइनल में 16 साल की मनु सिर्फ 16 प्वाइंट ही हासिल कर सकीं। वहीं इसी इवेंट में रही सरनोबत अचूक निशाना लगाती रहीं।
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राही ने 2010 दिल्ली और 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इस दौरान वह फार्म में थी लेकिन बांह की चोट के कारण उन्हें करीब एक साल का लंबा ब्रेक लेना पड़ा और इससे उनकी फार्म में गिरावट आ गई।

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2016 में चोट के कारण राही पूरे साल निशानेबाजी नहीं कर सकी थी। फिर दिसंबर 2016 और जनवरी 2017 में प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेना शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 2017 उनके लिए मिश्रित नतीजों वाला रहा। मुश्किलों को चुनौती देकर आगे बढ़ने वाली राही अकेली एथलिट नहीं। अगली स्लाइड में जानिए हालातों को हराकर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के बारे में....
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- फोटो : amar ujala
बजरंग पूनिया
देश को कुश्ती में गोल्ड मेडल दिलाने वाले बजरंग का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। उनके पिता बलवान पूनिया भी एक पहलवान थे, लेकिन पैसों तंगी और खराब हालातों के चलते उन्हें कभी खुद को साबित करने का मौका नहीं मिला। परिवार के खस्ता हालात तब भी बरकरार रहे जब बजरंग पहलवानी सीख रहे थे, लेकिन पिता ने अपनी तरह बेटे के अरमानों को बलि नहीं चढ़ने दी।
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विनेश फोगाट

विनेश ने भी कुश्ती में गोल्ड मेडल दिलाया। द्रोणाचार्य अवार्ड विजेता महावीर फोगाट की भतीजी और इंटरनेशनल पहलवान गीता फोगाट-बबीता फोगाट की चचेरी बहन हैं। महावीर फोगाट के भाई राजपाल यानी विनेश के पिता की एक हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद महावीर फोगाट ने ही अपनी बेटियों के साथ विनेश और उसकी बहन प्रियंक को अपनाया और पहलवानी की ट्रेनिंग दी।
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संजीव राजपूत

पिता सड़क किनारे ठेला लगाकर पूड़ी बेचा करते थे, लेकिन बेटे को एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया। बेटे ने भी पिता के सपने को उड़ान दी और एशियन गेम्स में ऐसा इतिहास रचा कि दुनिया देखती रह गई। संजीव राजपूत ने इंडोनेशिया में चल रहे 18वें एशियाड में रजत पदक पर निशाना लगाया।
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