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बोल-सुन नहीं सकतीं लेकिन अपने हुनर से देश को गौरवान्वित कर रही मेरठ की ये बेटियां

Sat, 03 Nov 2018 05:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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आरुषि और निशा
‘हर रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़े हैं, ऐ जिंदगी देख मेरे हौंसले तुझसे भी बड़े हैं’ ये चंद पंक्तियां मेरठ की इन दो बेटियों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। दोनों ही बोल-सुन नहीं सकती, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने हौंसले और हुनर की बदौलत इन दोनों बेटियों ने दो दिन पहले मलेशिया में अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में पहला पदक हासिल किया है।

 
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आरुषि
मेरठ के बृह्मपुरी क्षेत्र के मास्टर कालोनी गली नंबर-6 निवासी बालकिशन के घर 13 साल पहले जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ। जुड़वा बच्चों में उन्होंने बेटे का नाम आरव और बेटी का नाम आरुषि रखा। बेटा तो पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन बेटी बोल-सुन नहीं पाती थी। पिता बालकिशन स्टेशनरी प्रिटिंग का काम करते हैं। 
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आरुषि
पिता ने बताया आर्थिक समस्या के चलते वो निजी अस्पताल में बेटी का इलाज कराने में सक्षम नहीं थे। डाक्टरों से राय के बाद परिवार के लोग दो साल बाद बेटी आरुषि को इलाज कराने दिल्ली एम्स लेकर गये। जहां । तीन साल की उम्र्र में एम्स के डाक्टरों ने आरुषि का आपरेशन कर कॉक्लीयर इंप्लांट किया। 

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आरुषि और निशा
इसके जरिये आरुषि शर्मा को सुनने में मदद मिलने लगी। लेकिन वो करीब तीन फीट की दूरी से ही आवाज को सुनने में सक्षम है। सुनने के अलावा आरुषि को बोलने में समस्या होती है। पैदाइशी समस्या के बावजूद परिवार के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। 10 साल की उम्र में बैडमिंटन खेल में बेटी और बेटे को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
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आरुषि और निशा
कैलाश प्रकाश स्टेडियम में दोनों बहन भाई बैडमिंटन हॉल में अभ्यास करने लगे। जहां आरुषि को उसको साथी के तौर पर निशा प्रवीन मिली। निशा लिसाड़ीगेट के गोलाकुआं आजाद रोड़ निवासी सलीम अहमद की बेटी है। जो दूध की डेरी का काम करते हैं। वर्तमान में आरुषि की उम्र 13 वर्ष और निशा की उम्र 19 वर्ष है। 
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आरुषि
निशा पूरी तरह सुन और बोल नहीं सकती है। लेकिन दोनों बेटियों में बैडमिंटन में कुछ कर गुजरने का हौसला सभी को चौंका रहा था। दोनों ने ऐसा करके भी दिखाया। जिला स्तर, मंडल स्तर और नेशनल स्तर पर कई  पदक हासिल किये। 
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मेरठ न्यूज
दो दिन पूर्व मलेशिया में आयोजित यूथ ऐशिया पेसिफिक गेम्स में बैडमिंटन डबल में ब्रांज मैडल हासिल किया।  निशा का परिवार मलेशिया में उसके साथ है। जबकि आरुषि और भाई आरव शर्मा मलेशिया में मौजूद हैं। पिता बालकिशन ने बताया पांच नवंबर को दोनों मलेशिया से मेरठ पहुंचेगी।    

 

क्या हैं कॉक्लीयर इंप्लांट -

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आरुषि
एक ऐसी सबसे छोटी डिवाइस जो मूकबधिर बच्चों को आवाज सुनने में मदद करती है। कॉक्लीयर डिवाइस से आवाज टकराने के बाद इलेक्ट्रानिक ध्वनि पैदा करती है। जो श्रवण तंत्रिका का उत्तेजित करता है। 

 
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आरुषि और निशा
दिमाग इस ध्वनि को अच्छे से स्वीकार करता है और मूकबधिर सुनने और बोलने में एक हद तक सक्षम हो जाता है। आरुषि के पिता बालकिशन ने बताया एम्स के डाक्टरों ने बताया कॉक्लीयर इंप्लांट सिर्फ 3 से 7 साल तक के बच्चों का ही हो सकता है।   
       
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