‘हर रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़े हैं, ऐ जिंदगी देख मेरे हौंसले तुझसे भी बड़े हैं’ ये चंद पंक्तियां मेरठ की इन दो बेटियों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। दोनों ही बोल-सुन नहीं सकती, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने हौंसले और हुनर की बदौलत इन दोनों बेटियों ने दो दिन पहले मलेशिया में अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में पहला पदक हासिल किया है।