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Birthday Special: 1300 रुपये महीने कमाने वाले की बेटी कैसे बनी बॉक्सर, जानें लवलीना के संघर्ष की कहानी

Sun, 02 Oct 2022 07:59 AM IST
रोहित राज स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लवलीना बोर्गोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में जब कांस्य पदक जीता था, तब किसी ने सोचा नहीं था कि असम के छोटे से गांव से निकलकर देश का नाम सबसे बड़े खेल समारोह में रोशन करेगी।
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लवलीना बोर्गोहेन - फोटो : सोशल मीडिया
लवलीना बोर्गोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में जब कांस्य पदक जीता था, तब किसी ने सोचा नहीं था कि असम के छोटे से गांव से निकलकर देश का नाम सबसे बड़े खेल समारोह में रोशन करेगी। उस जीत के बाद लवलीना बॉक्सिंग की नई स्टार बन गईं। वह कई लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं। लवलीना का आज (रविवार) 25वां जन्मदिन है। आइए असम के गोलाघाट जिले के बरो मुखिया गांव में पैदा होने वाली इस स्टार खिलाड़ी के बारे में जानते हैं...
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लवलीना बोर्गोहेन - फोटो : सोशल मीडिया
लवलीना मुक्केबाजी में आने से पहले किक बॉक्सिंग करती थीं, जिसमें वो राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीत चुकी हैं। दरअसल, लवलीना ने अपनी बड़ी बहनों लीचा और लीमा को देखकर किक बॉक्सिंग करना शुरू किया था। बचपन में लवलीना को काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा।
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लवलीना बोर्गोहेन - फोटो : social media
लवलीना के पिता टिकेन एक छोटे व्यापारी थे और 1300 रुपये महीना कमाते थे। असम से ओलंपिक की राह इतनी आसान नहीं थी। मगर इस मुक्केबाज ने दिखा दिया कि अगर हिम्मत व जुनून के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं होता।

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लवलीना बोर्गोहेन - फोटो : सोशल मीडिया
एक बार लवलीना के पिता टिकेन मिठाई लाए थे। वह जिस अखबार में मिठाई को लपेट लाए थे उसे लवलीना ने बाद में देखा था। उसमें मशहूर मुक्केबाज मोहम्मद अली के बारे में लिखा था। मोहम्मद अली के बारे में पढ़कर लवलीना के मन में बॉक्सर बनने की तमन्ना जाग उठी।
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लवलीना बोर्गोहेन - फोटो : सोशल मीडिया
किक-बॉक्सिंग करने वाले लवलीना का ट्रायल प्राइमरी स्कूल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के लिए हुआ। उन पर कोच पादुम बोरो की नजर पड़ी। यहीं से लवलीना का जीवन बदल गया।
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लवलीना बोर्गोहेन - फोटो : सोशल मीडिया
पादुम बोरो के मुताबिक, ''लवलीना के माता-पिता ने उसका पूरा सपोर्ट किया। वे अक्सर मेरे साथ उसके खेल पर चर्चा करते थे और उसके सपनों के लिए कुछ भी करने को तैयार थे।''
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लवलीना बोर्गेहेन - फोटो : सोशल मीडिया
बोरो ने इंटरव्यू में कहा था, ''लवलीना में एक बेहतरीन बॉस्कर बनने की प्रतिभा थी। हमने केवल उसका मार्गदर्शन किया। करियर के शुरू में भी उसका शांत दिमाग उनकी सबसे खास बात थी। वह ऐसी नहीं है जो आसानी से हार मान जाए। वह तनाव नहीं लेती है। वह बहुत अनुशासित खिलाड़ी है।''
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लवलीना को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया था - फोटो : सोशल मीडिया
लवलीना ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतने के अलावा वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक (2018 और 2019) जीत चुकी हैं। उनके नाम एशियन चैंपियनशिप में भी दो कांस्य (2017 और 2021) पदक हैं। इस बार राष्ट्रमंडल खेलों में उनके स्वर्ण की उम्मीद थी, लेकिन वह कांस्य भी नहीं जीत पाईं। लवलीना आगे बेहतरीन प्रदर्शन करने का वादा किया है। उनसे एशियन गेम्स के अलावा पेरिस ओलंपिक में पदक की उम्मीद है।
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