1948 ओलंपिक में हॉकी टीम की ऐतिहासिक जीत से लेकर टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा के जेवलिन में स्वर्ण जीतने तक देश ने क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में कई यादगार पल देखें। हमने उन्हीं में से 10 सबसे बेहतरीन पलों का संकलन किया है।
विज्ञापन
1 of 11
1948 में भारतीय हॉकी टीम और 2021 में नीरज चोपड़ा
- फोटो : सोशल मीडिया
भारत ने आजादी के 75 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान 1947 से अब तक देश ने कई क्षेत्रों में यादगार सफलता हासिल की। खेल भी उसी का एक हिस्सा है। 1948 ओलंपिक में हॉकी टीम की ऐतिहासिक जीत से लेकर टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा के जेवलिन में स्वर्ण जीतने तक देश ने क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में कई यादगार पल देखें। हमने उन्हीं में से 10 सबसे बेहतरीन पलों का संकलन किया है।
विज्ञापन
1. भारत ने अंग्रेजों को उन्हीं के घर में रौंदा (ओलंपिक 1948)
2 of 11
1948 ओलंपिक में स्वर्ण जीतने के बाद भारतीय हॉकी टीम
- फोटो : सोशल मीडिया
1947 में आजादी मिलने के बाद भारत अगले साल ओलंपिक में उतरा। लंदन में हुए इन खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया। टीम इंडिया ने मेजबान ब्रिटेन की टीम को हराकर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत लिया। यह भारत का 1948 ओलंपिक में पहला स्वर्ण पदक जीता था। साथ ही आजादी का बाद ओलंपिक खेलों में भी पहला गोल्ड था। भारत ने ब्रिटेन को 4-0 से हराया था।
विज्ञापन
2. मिल्खा सिंह 0.1 सेकंड से पदक चूके (1960 ओलंपिक)
3 of 11
मेरठ: मिल्खा सिंह
- फोटो : amar ujala
मिल्खा सिंह 400 मीटर दौड़ के फाइनल में पदक के दावेदार थे। उन्होंने शानदार तरीके से दौड़ की शुरुआत की और बढ़त बना ली। 250 मीटर तक वह आगे थे। उसके बाद वह धीमे हो गए। उनके विपक्षी उनसे आगे हो गए। मिल्खा सिंह इतिहास रचते-रचते रह गए। वह 0.1 सेकंड से पदक से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। वह पदक से भले ही चूक गए, लेकिन उन्होंने इस खेल के प्रति लाखों लोगों को प्रेरित किया।
3. फुटबॉल में गोल्ड (1962 एशियन गेम्स)
4 of 11
1962 एशियन गेम्स में भारतीय फुटबॉल टीम
- फोटो : सोशल मीडिया
भारत ने दक्षिण कोरिया से 2-0 से हार के साथ अपने ग्रुप में शुरुआत की, लेकिन फिर थाईलैंड और जापान को हराकर सेमीफाइनल में अपना स्थान पक्का किया। वहां दक्षिण वियतनाम को 3-2 से हराने के बाद टीम इंडिया फाइनल में पहुंच गई। कोरिया के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं था। दोनों टीमों के बीच मैच के दौरान लगातार बहस देखने को मिली। उस मैच को भारत ने अंत में 2-1 से जीत लिया।
विज्ञापन
4. पीटी उषा को चार स्वर्ण पदक (1986 एशियन गेम्स)
5 of 11
पीटी उषा
- फोटो : सोशल मीडिया
जब 1986 में सियोल में एशियाई खेल शुरू हुए तब तक 22 वर्षीय पीटी उषा स्टार बन चुकी थीं। उन्होंने सियोल में धमाल मचा दिया। उषा ने 200 मीटर, 400 मीटर, 400 मीटर बाधा दौड़ और 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इसके अलावा 100 मीटर में उन्हें रतज पदक से संतोष करना पड़ा था। उषा कोरिया में स्टार से सुपरस्टार बन गईं।
विज्ञापन
5. कर्णम मल्लेश्वरी को वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक (2000 ओलंपिक)
6 of 11
कर्णम मल्लेश्वरी
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 2000 में सिडनी में कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने 69 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता। मल्लेश्वरी ने कुल 240 किग्रा वजन उठाया। वह चीन की लिन वेनिंग और हंगरी की एर्जसेबेट मार्कस के बाद तीसरे स्थान पर रहीं। मल्लेश्वरी ने अपनी अंतिम लिफ्ट में 137.5 किलोग्राम भार उठाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहीं। यदि वह सफल होती तो उनका कुल वजन 247.5 होता। वह स्वर्ण जीतने में सफल हो जातीं।
विज्ञापन
6. अंजू बॉबी जॉर्ज को लॉन्ग जंप में कांस्य पदक (2003 वर्ल्ड चैंपियनशिप)
7 of 11
अंजू बॉबी जॉर्ज
- फोटो : सोशल मीडिया
2002 बुसान एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने के बाद अंजू बॉबी जॉर्ज अपना नाम बना चुकी थीं। उन्होंने अगले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया। अंजू ने पहले जंप में 6.61 मीटर की दूरी तय की थी। उन्होंने पांचवें जंप में उन्होंने 6.70 मीटर की दूरी तय करके तीसरा स्थान हासिल कर लिया। वह अपने नेशनल रिकॉर्ड से दूर रहीं, लेकिन सीजन का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। अंजू वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई थीं।
7. राज्यवर्धन सिंह राठौर को शूटिंग में रजत पदक (2004 ओलंपिक)
8 of 11
राज्यवर्धन सिंह राठौर
- फोटो : सोशल मीडिया
एथेंस ओलंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौर ने इतिहास रचा। भारत के तीन खिलाड़ियों ने शूटिंग के फाइनल में अपनी जगह पक्की थी। राठौर से पहले अंजलि भागवत और अभिनव बिंद्रा पदक से चूक गए थे। राठौर ने दबाव पर काबू पाते हुए देश को ओलंपिक के एकल स्पर्धा में पहला रजत पदक दिलाया।
8. नारायण कार्तिकेयन पहले भारतीय फॉर्मूला वन रेसर बने (2005)
9 of 11
नारायण कार्तिकेयन
- फोटो : सोशल मीडिया
नारायण कार्तिकेयन साल 2005 में भारत के पहले फॉर्मूला वन रेसर बने थे। उनका संबंध भारत के पूर्व रेसिंग ड्राइवर एस. कारिवर्धन से है। 2005 के बाद नारायण दो साल के लिए विलियम्स एफ1 टेस्ट ड्राइवर बने। 2007 में उन्होंने इंडियन ए1 टीम के लिए ड्राइविंग की थी।
9. अभिनव बिंद्रा को शूटिंग में स्वर्ण (2008 ओलंपिक)
10 of 11
अभिनव बिंद्रा
- फोटो : सोशल मीडिया
बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक इतिहास में भारत को जश्न मनाने का सबसे बड़ा पल दिया। यह भारत का अब तक का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण था। बिंद्रा ने क्वालीफाइंग दौर के अंत में चौथे स्थान पर थे, लेकिन अंतिम राउंड में 104.5 के स्कोर के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा कर देश को उत्सव मनाने का अवसर दिया।
10. नीरज चोपड़ा को जेवलिन में स्वर्ण (2020 ओलंपिक)
11 of 11
नीरज चोपड़ा
- फोटो : सोशल मीडिया
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच दिया। उन्होंने जेवलिन के फाइनल मुकाबले में 87.58 मीटर दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया था। नीरज ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने थे। ओलंपिक में एकल स्पर्धा में भारत का यह दूसरा स्वर्ण पदक था। इसके लिए देश को 13 सालों तक इंतजार करना पड़ा। टोक्यो ओलंपिक का आयोजन कोरोनावायरस के कारण 2020 की जगह 2021 में हुआ था। भारत को एकल में पिछला स्वर्ण 2008 में अभिनव बिंद्रा ने दिलाया था।