कई बार घटने वाली घटना का अहसास पहले ही हो जाता है। कुछ लोग तो भविष्य के बारे में थोड़ा बहुत बता भी देते हैं, जो लगभग सही साबित होता है। आपके मन में भी ये सवाल जरूर उठता होगा कि आखिर कैसे इन्हें भविष्य के बारे में पता चल जाता है। इसका एक कारण साधना भी होती है, जिसमें व्यक्ति का मन एकाग्र होता है। इन्हीं साधना में से एक है पंचांगुली साधना, जिसकी पूरी होने पर व्यक्ति को भविष्य का आभास होता है।
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पंचांगुली साधना को त्रिकालदर्शी साधना भी कहा जाता है, जिसके 8 तत्व होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस साधना को सिद्ध करने वाला व्यक्ति भूतकाल से लेकर भविष्यकाल तक देख लेता है।
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इस साधना को शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी और पूर्णमासी को ही करें। ब्रह्म मुहूर्त में एकांत स्थल पर सात दिन पर इस साधना को करें।
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पंचांगुली यंत्र व चिन्ह और स्फटिक माला, जो कि प्रतिष्ठायुक्त हो। पीले वस्त्रों में पीले आसन पर पूर्व दिशा की तरफ मुख बैठ जाएं। ध्यान रखें कि आपको गुरु चादर भी ओढ़ना है।