मुश्किल घड़ी में लोग अक्सर भगवान के पास जाते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं। माना जाता है कि भगवान से प्रार्थना करने पर सारी मुश्किलें चली जाएगी। हालांकि प्रार्थना मुश्किल घड़ी में असरदार साबित होती है, लेकिन वो भगवान की वजह से नहीं बल्कि आपकी खुद की वजह से...जानिए कैसे
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प्रार्थना करने से व्यक्ति की उदासी का स्तर कम होता है। साथ भावनात्मक रूप से भी मजबूत होता है। जो भी व्यक्ति सप्ताह में कम से कम एक बार प्रार्थना करता है वो अपने गुस्से और नकारात्मक स्थिति आदि को संभाल लेते हैं।
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दरसअल जब किसी का मूड बेहद खराब होता है और वो इसका गुस्सा अपने किसी नजदीकी पर निकालता है तो इससे हिंसा और भी बढ़ जाती है। जबकि भगवान के सामने चिल्ला कर उनसे बात करने पर बिना किसी हिंसा के मन का बोझ हल्का हो जाता है। इसी वजह से प्रार्थना करने से भावनात्मक कष्टों से राहत पाने में मदद मिलती है।
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इस पर कई लोगों का ये भी मानना है कि वे इस चीज को मानकर प्रार्थना कर रहे हैं कि भगवान उन्हें देख रहे हैं और उन्हें अपनी कीमत समझने में इससे मदद भी मिलती है।
वैसे भगवान से बात करने की जो क्रिया एक सजीव संपर्क की तरह ही है। किसी व्यक्ति की कल्पना करके आप बात नहीं कर सकते है, लेकिन ईश्वर हमारे सामने है इसकी कल्पना मात्र से ही उनसे आसानी से बात कर सकते हैं। इसके विपरीत यह सही है कि भगवान में विश्वास नहीं है तो प्रार्थनाओं का प्रभाव न होता। उनके लिए ईश्वर की सत्ता वास्तविक है।