हिन्दू धर्म के पूजा-पाठ और किसी भी कर्मकांड में मंत्रों के जाप का विशेष महत्व होता है। मंत्र के बिना कोई भी पूजा पूरी नहीं होती है। मंत्रों के जाप करने की विशेष संरचना होती है सिद्ध मंत्रों के जाप से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंत्र दो प्रकार के होते है एक मंत्र वह होते है जिनका जाप हर कोई कर सकता है और दूसरा मंत्र वह होता है जिसका जाप केवल व्यक्ति विशेष ही कर सकता है।
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मंत्र में होने वाले हर एक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। मंत्रों के जाप करते समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। जाप करते समय मंत्र सबसे पहले शरीर पर फिर मन पर और अंत में आत्मा पर प्रभाव डालते हैं। जिसका असर होता है।
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अगर हम मंत्रों का जाप सही तरीके से करते है हमें उसका लाभ मिलता है लेकिन वही अगर गलत तरीके से मंत्र का उच्चारण करते हैं तो हमें लाभ की जगह नुकसान उठाना पड़ता है। कभी भी मंत्रों का जाप बुरी भावना से नहीं करना चाहिए।
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मंत्र का जाप करने के लिए उचित स्थान का चुनाव करना बहुत जरूरी होता है। मंत्र का जाप हमेशा आसन पर बैठ कर ही करना सही माना जाता है। बैठने का आसान सफेद या फिर काले रंग का होना चाहिए।
मंत्रों का जाप करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जप करने के लिए हाथ में कोई न कोई माला जरूर होनी चाहिए। जप में चंदन या रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है।