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विदुर नीति: सफलता पाने का अचूक मंत्र हैं महाभारत काल के विदुर की ये पांच बातें

Tue, 02 Jun 2020 05:30 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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विदुर नीति - फोटो : Social Media
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महाभारत काल के महान दार्शनिक विदुर की नीतियों को हम विदुर नीति के नाम से जानते हैं। उनकी नीतियां सफलता पाने के लिए अचूक मंत्र के समान हैं। विदुर द्वारा दिखाया गया दर्शन केवल महाभारत काल तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने पहले थे। विदुर नीति में दिए गए उनके मंत्र किसी भी चुनौतियों पर विजय पाने के लिए पर्याप्त हैं। आज हम आपको उनकी ऐसी पांच नीतियों को बताने जा रहे हैं जिनके द्वारा आप सफलता की ऊंचाइयों को छू सकते हैं। विदुर नीति की ये पांच बातें इस प्रकार हैं - 

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  • व्यक्ति को कभी नहीं करना चाहिए अहंकार
अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण होता है। पौराणिक कथाओं में ऐसे कई उदाहरण हमें देखने को मिलते हैं कि जिन व्यक्तियों ने अहंकार किया है उनका सर्वनाश ही हुआ है। रावण को भी अपनी शक्ति का घमंड हुआ था। नतीजा क्या हुआ सब जानते हैं। व्यक्ति को अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। विदुर नीति के अनुसार जो व्यक्ति खुद को अहंकार समझने लगता है उसका शीघ्र ही पतन निश्चित हो जाता है। ऐसे व्यक्ति की उम्र भी कम होती है। 

  • वाणी पर संयम रखने की सलाह
कई बार ऐसा होता है कि हम जाने अंजाने में कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिसका दुष्परिणाम हमें भुगतना पड़ता है। ऐसा तभी संभव होता है जब हम अपनी वाणी पर लगाम नहीं लगाते हैं। विदुर के मुताबिक व्यक्ति को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। क्योंकि धनुष से निकला बाण और मुंह से निकली वाणी कभी वापस नहीं होती है। हमारी बात का प्रभाव दूसरे व्यक्तियों पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। इसलिए हमें सोच समझकर बोलना चाहिए।

  • त्याग करने की भावना है श्रेष्ठ
समाज हित में त्याग करने की भावना मनुष्य को श्रेष्ठता की ओर ले जाती है। उदाहरण के लिए इतिहास में जिन लोगों ने किसी जीव-जंतु या समाज हित के लिए त्याग किया है। वे महापुरुष आज भी पूजनीय और वंदनीय हैं। विदुर नीति के अनुसार, एक सफल व्यक्ति के अंदर त्याग की भावना अवश्य होनी चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने पिता के वचन का पालन करने से लिए अयोध्या के सिंहासन को त्याग दिया था।

  • लालच और स्वार्थ हैं मनुष्य के बड़े शत्रु
लालच और स्वार्थ मनुष्य के शत्रु हैं। ऐसा व्यक्ति कभी किसी की नजरों में अच्छा नहीं बन सकता है। लालच और स्वार्थ के कारण भले किसी को सफलता मिल जाए, लेकिन ऐसा व्यक्ति शीघ्र ही पतन के कगार पर आ जाता है। समाज में लालची और स्वार्थी व्यक्ति को सदैव हीन भावना के साथ देखा जाता है। अपनी नीति में विदुर कहते हैं कि मनुष्य को अपनी ऐसी बुराइयों का त्याग शीघ्र करना चाहिए।
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  • क्रोध है मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन
क्रोध व्यक्ति को विवेकहीन बनाता है। क्रोध के ही कारण हिंसा जन्म भी लेती है। क्रोधी व्यक्ति सदा किसी न किसी से लड़ता झगड़ता रहता है। ऐसे में समाज में उसकी छवि नकारात्मक हो जाती है। कई बार क्रोध में आकर व्यक्ति ऐसा काम कर देता है जिसका पश्चाताप उसे पूरे जीवनभर करना पड़ता है। विदुर कहते हैं कि व्यक्ति को अपने क्रोध को मारना चाहिए। 
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