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Varuthini Ekadashi 2020: भगवान विष्णु के स्वरूप से जानिए सफलता के मूल मंत्र

Sat, 18 Apr 2020 01:39 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु  इस जगत के पालनहार हैं। विष्णु भगवान  की अर्धांग्नि माता लक्ष्मी हैं और विष्णु भगवान माता लक्ष्मी के साथ क्षीर सागर में रहते हैं। श्री हरि विष्णु जी का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली है। विष्णु भगवान सदैव ही चक्र, शंख, पद्म और गदा धारण करे रहते हैं। आइए, आज जानते हैं इस स्वरूप से क्या सीखने को मिलता है...

 
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दूरदर्शिता 
  • भगवान विष्णु जी का अमोघ शस्त्र सुदर्शन चक्र है। सुदर्शन चक्र हमें लक्ष्य के प्रति एकाग्र होने का संदेश देता है। जिस तरह चक्र एकाग्रता से अपने लक्ष्य को भेदने की शक्ति रखता है, ठीक उसी प्रकार हमें भी दृढ़-निश्चय कर लक्ष्य की तरफ बढ़ना चाहिए। 
 
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जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
  • शंख की ध्वनि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख से निकलने वाली ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। आध्यात्मिक दृष्टि से शंख से निकलने वाली ध्वनि ॐ की ध्वनि के समान होती है। यह ध्वनि हमारी अंतरआत्मा और चेतना को जागृत करती है। हमें भी शंख की भांति लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करना चाहिए। 


 

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बल और शक्ति 
  • भगवान विष्णु के हाथों में गदा बल और शक्ति को दर्शाती है। बल से दुष्टों का नाश किया जा सकता है और सज्जनों की रक्षा। भगवान विष्णु के इस शस्त्र से हमें बल के महत्व के बारे में ज्ञान होता है। जीवन में सफलता के लिए बल और शक्ति का होना जरूरी है। व्यक्ति को बल और शक्ति का गलत प्रयोग नहीं करना चाहिए।

 
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एकाग्रता और सत्यता 
  • भगवान विष्णु ने हाथ में कमल का फूल धारण किया हुआ है। यह पुष्प एकाग्रता और सत्यता का प्रतीक होता है। जिस प्रकार कमल का फूल कीचड़ में रहकर भी अपने को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखता है, ठीक वैसे ही हमें भी सफल व्यक्ति बनने के लिए संसार रूपी माया में रहते हुए स्वयं को निष्पापी बनाए रखना है।
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